राजकुमार भगत
पाकुड़ । 30 जून हूल दिवस के 169 वीं जयंती के अवसर पर संथाल परगना के महान क्रांति हुल नायक की स्मरण में आदिवासी छात्र संघ के के एम कॉलेज पाकुड़ के छात्र-छात्राओं द्वारा पाकुड़ शहरी क्षेत्र में केकेएम कॉलेज से सिद्धू कानू चौक होते हुए नगर में पारंपरिक वेशभूषा, तीर धनुष से लेश होकर नगाड़ो के गगन भेदी मधुर ध्वनि के साथ नगर में शोभा यात्रा झांकी निकाल कर लोगों को प्रेरणा दी। इसकी शुरुआत पाकुर के के एम कॉलेज के प्राचार्य ने हरी झंडी दिखाकर की। प्राचार्य ने छात्रों को संबोधित करते हुए वीर सिद्धू कान्हू एवं चंद भैरव की गौरव गाथा पर प्रकाश डाला। छात्र नायकों ने वीर सिद्धू कानू एवं चांद भैरव के मानव रूपी प्रतिमा की झांकी का संपूर्ण शहर में भ्रमण कराया। इस बीच शहर में वीर सिद्धू कानून अमर रहे चांद भैरव अमर रहे के नारों से शहर गुंजायमान रहा। छात्र-छात्राओं भगत पाड़ा थाना पड़ा होते हुए बिरसा चौक पर बिरसा मुंडा के प्रतिमा पर माल्यार्पण किया। नगर भ्रमण के पश्चात सभी छात्र पंक्ति बद्ध अनुशासन के साथ सिद्धू कान्हु पार्क पहुंचे वहां स्थित क्रांतिकारी वीर सिद्धू कान्हू एवं चांद भैरव के प्रतिमा पर सभी छात्र-छात्राओं ने श्रद्धा सुमन अर्पित किया एवं उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी।
मांझी परगना लहंती वैसी ने सिद्धू कानू की जीवनी पर डाला प्रकाश
फूल दिवस के मौके पर मांझी परगना लहंती वैसी ग्राम प्रधानों की संगठन ने भी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर सिद्धू कान्हु और चांद भैरव के द्वारा संथाल विद्रोह से संबंधित रूप से उनके गौरव गाथा को बताया गया।अध्यक्ष सनत सोरेन ने कहा की आज की युवा पीढ़ी को सिद्धू कानू के आदर्श और उनके संघर्षों को याद कर उनके आदर्शों पर चलना चाहिए। हमें अपने आदिवासी समाज को जागरूक और शिक्षित करने की घोर आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि संथाल परगना काश्तकारी अधिनियम का आज भी नियमों से पालन नहीं हो रहा है। हमारा प्रयास होगा कि शासन और प्रशासन को इस दिशा में कारगर कदम उठाएं।






