बजरंग पंडित पाकुड़।
अमरभीठा पेयजल संकट:- देश को आजाद हुए 76 वर्ष हो गया है लेकिन आज भी इस गांव में पीने को पानी नहीं, इस गांव में ना कोई कुआ, ना हैंडपंप,ना कोई नल बना।
झारखंड के पाकुड़ जिले की सबसे पिछड़ा प्रखंड लिट्टीपाड़ा की एक आदिम जनजातीय गांव की यह तस्वीर है भारत देश को आजाद हुए 76 वर्ष हो गया है लेकिन आज भी इस गांव में ना कोई कुआं बना और ना कोई हैंडपंप बना और ना ही कोई नल लगा, गांव वासियों के अनुसार इन लोगों की हालत देखने ना इनकी की मुखिया जी आती है ना इनलोगो का विधायक और ना ही इनके सांसद आते हैं गांव वालों से पूछने से पता चला कि इन लोगों का मुखिया का नाम माड़ी पहाड़िन (कर्माटांड़ पंचायत) हैं इन लोगों का विधायक दिनेश मरांडी हैं और इन लोगों का सांसद विजय हैं। झारखंड में एक आदिवासी मुख्यमंत्री होने के बावजूद भी झारखंड के आदिवासी गांव की यह दशा है यह बहुत ही शर्मनाक दृश्य है इन लोगों का विधायक, सांसद, मुख्यमंत्री तीनों एक ही पार्टी के हैं झारखंड मुक्ति मोर्चा फिर भी यह हालत हैं त्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद भी गांव की यह दशा है।
गांव की महिलाएं अपनी दुख बताते बताते रोने लगी इस अमरभीठा गांव की महिलाएं 1:00 बजे रात को उठ कर गांव से 1.5KM दूर एक पहाड़ के उस पर जंगलों से घिरा हुआ खरारनक जगह पर लाइट पानी लाने जाती है और इन गांव वासियों को वहां से पांच बाल्टी पानी भी नहीं मिलता है किसी तरह गांव के बच्चे कुआं में घुसकर कटोरा भर भर के दो चार बाल्टी पानी निकलता है उस पानी से अमरभीठा गांव की प्यास बुझती है।
भारत के बड़े-बड़े महापुरुषों ने कहा है कि जल ही जीवन है लेकिन इस अमरभीठा गांव में किसी तरह जीवन बचा है क्योंकि यहां जल ही नहीं है।
गांव वालों का कहना है कि इनका लिखित शिकायत दिया प्रखंड कार्यालय में अपने मुखिया जी के यहां कई बार आवेदन दिया लेकिन इन लोगों की कोई नहीं सुनी।
गांव वालों की मांग है की 15 दिनों के भीतर गांव में पानी की व्यवस्था होनी चाहिए नहीं तो हम लोग अपना हक के लिए सड़क पर आएंगे या कहीं जिला कार्यालय में धरना देंगे।
मेरी पहाड़ी, (महिला निवासी), बामना पहाड़िया, एवं समस्त ग्रामवासी,अमरभीठा।








