राजकुमार भगत
पाकुड़। बिहार में जाति आधारित जनगणना की रिपोर्ट जारी होने के बाद झारखंड में भी जाति जनगणना की मांग उठने लगी है ।आजसू जिलाध्यक्ष आलमगीर आलम ने 4 अक्टूबर को बयान जारी कर झारखंड में भी जाति आधारित जनगणना कराने की मांग की है। कहा कि बिहार पहला ऐसा राज्य है जिसने जाति आधारित जनगणना करवाई और पूरे देश के सामने रिपोर्ट जारी की। सरकार की सारी योजनाएं जाति और वर्ग आधारित बनती है और जब जाति आधारित जनगणना ही नहीं होगी, तो सारी प्लानिंग फेल होना निश्चित है।
वर्ष 2024 में प्रस्तावित लोकसभा और विधानसभा चुनाव के पूर्व ही जातिगत जनगणना कराने की मांग की गई है।आजसू जिलाध्यक्ष आलमगीर आलम* ने कहा कि झारखंड में भी जाति आधारित जनगणना होनी चाहिए. आखिर यहां भी पता चले कि किस जाति की कितनी आबादी है. इसके आधार पर फिर विकास की नीतियां बननी चाहिए।आजसू जिलाध्यक्ष आलमगीर आलम ने कहा कि बिहार की तर्ज पर झारखंड में भी जातिगत जनगणना होनी चाहिए ताकि सभी को समान अधिकार और समान विकास का लाभ मिल सके। समान अधिकार के लिए जातिगत जनगणना जरूरी है। झारखंड में ओबीसी बहुसंख्यक हैं। यह बात किसी से छिपी नहीं है। अन्य जातियां भी कितनी हैं, यह सामने आना चाहिए। इसलिए झारखंड सरकार को बिना देर किए, तुरंत इसकी घोषणा करते हुए सर्वे शुरू कराना चाहिए।










