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April 28, 2026 7:53 am

ब्रह्ममुहूर्त में करें मां कालरात्रि की पूजा अर्चना

सतनाम सिंह

पाकुड़। 21 अक्टूबर शारदीय नवरात्रि की सप्तमी तिथि है । इस दिन मां की सातवीं स्वरूप शक्ति मां कालरात्रि की पूजा का विधान है। मां कालरात्रि शत्रु को विनाश करने के लिए जानी जाती हैं। इसलिए इनका नाम कालरात्रि है । मां कालरात्रि भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान देती हैं । इसलिए इन्हें शुभंकरी भी कहा जाता है । मां काल रात्रि तीन नेत्रों वाली देवी है। इनकी पूजा अर्चना से रोग, भूत ,प्रेत ,अकाल मृत्यु, रोक शोक आदि सभी प्रकार की परेशानियां समाप्त हो जाती है।
मां कालरात्रि की पूजा अति प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में करनी चाहिए। मां कालरात्रि की पूजा अर्चना फल , धूप ,पुष्प ,गढ़, मिष्ठान, पंचमेवा धूप दीप , चंदन इत्र रोड़ी अक्षत आदि से किया जाता है। उन्हें गुड का पकवान बहुत पसंद है।
कहां जाता है की मां दुर्गा को कालरात्रि के रूप शंभू निशुंभ और रक्त बीच के मारने के लिए लेना पड़ा था। मां कालरात्रि का शरीर काली है। श्वास से आग निकलती है, मां की कैस बिखरे हुए रहते हैं । देवी कालरात्रि के तीन नेत्र हैं एवं चार हाथ है ।जिसमें पहले हाथ में खड़ग वअस्त्र, दूसरे हाथ में लौह अस्त्र, तीसरे हाथ में अभय मुद्रा में है एवं चौथे हाथ वरमुद्रा में है । मां का स्वरूप केवल पापियों को नाश करने के लिए है ।जो अपने तीनों नेत्रों से भक्तों पर कृपा करती है ।नवरात्रि में सप्तमी की रात्रि सिद्धियां की रात भी कही जाती है । इस दिन देवी की पूजा करने से शत्रुओं पर विजय प्राप्त होती है।

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