तालामुकु की जिंदगी भाई के सहारे, न आधार बना न राशन कार्ड; खबर के बाद प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा दिया।
महेशपुर। एक तरफ सरकार हर नागरिक को डिजिटल पहचान और योजनाओं से जोड़ने की बात कर रही है, दूसरी तरफ कदमपुर गांव की तालामुकु सोरेन करीब 35 साल से अपनी पहचान और अधिकारों के दस्तावेजों का इंतजार कर रही हैं। बचपन से दोनों आंखों की रोशनी खो चुकी तालामुकु के पास मतदाता पहचान पत्र है, लेकिन आधार कार्ड, राशन कार्ड और दिव्यांग प्रमाण पत्र नहीं है। दस्तावेजों के अभाव में उन्हें सरकारी राशन, दिव्यांग पेंशन और दूसरी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। अविवाहित तालामुकु अपने बड़े भाई के परिवार के सहारे जिंदगी काट रही हैं। परिवार की आर्थिक स्थिति भी ऐसी नहीं कि वह उनकी जरूरतों का पूरा खर्च उठा सके। दिन का अधिकांश समय वह घर में ही गुजारती हैं। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जिस महिला को चुनाव के दौरान मतदाता के रूप में पहचान मिल गई, वह सरकारी योजनाओं के लिए अब तक व्यवस्था की नजर में क्यों नहीं आ सकी? स्थानीय ग्रामीणों का कहना है कि गांव में उनकी स्थिति किसी से छिपी नहीं है, फिर भी इतने वर्षों तक उनके जरूरी दस्तावेज नहीं बन सके।
अब प्रशासन ने लिया संज्ञान
मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई का भरोसा दिया है। सीओ संजय कुमार सिंह ने कहा कि दो दिन की छुट्टी के बाद तालामुकु का दिव्यांग प्रमाण पत्र और अन्य जरूरी कागजात प्राथमिकता के आधार पर बनवाए जाएंगे। वहीं बीडीओ डॉ. सिद्धार्थ शंकर यादव ने कहा कि तालामुकु के इतने वर्षों से सुविधाओं से वंचित रहने की जानकारी उन्हें पहले नहीं थी। पंचायत सचिव से रिपोर्ट मंगाई जा रही है। इसके बाद आधार और राशन कार्ड बनवाने के साथ पात्रता के अनुसार उन्हें सभी सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की कार्रवाई की जाएगी।





