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June 19, 2026 4:31 pm

जोएल हांसदा के खेतों की सुंदरता बढ़ा रहे हैं लाल रंग के स्ट्रॉबेरी।

बीडीओ सिद्धार्थ शंकर यादव ने उनके स्टोबरी की खेती का अवलोकन किया, उत्साहवर्धन करते हुए विभाग द्वारा और मदद दिए जाने का दिया आश्वासन।

स्ट्रॉबेरी की खेती से जुड़े किसान जोएल हांसादा का चेहरा।

सानू कुमार

पाकुड़ जिले के महेशपुर प्रखंड के अहिल्यापुर गांव के किसान जोएल हांसदा ने स्ट्रॉबेरी की खेती कर आत्मनिर्भर हो रहे हैं. प्रखंड के अहिल्यापुर गांव के किसान जोएल हांसदा ने अपने 8 कट्टा खेत मे स्ट्रॉबेरी की खेती की है. इन पौधों में अब चटक लाल रंग के स्टोबरी फल रहे हैं और खेतों की सुंदरता बढ़ा रहे हैं. जोएल इनदिनों स्ट्रॉबेरी के फल की प्रत्येक दिन तुड़ाई कर रहे हैं और स्थानीय मार्केट के साथ-साथ पाकुड़ के फल दुकानों तक पहुँचा रहे हैं. उन्होंने बताया कि 500 से 600 सौ रुपये प्रति किलो स्ट्रॉबेरी बिक रहा है. वही पिछले शनिवार को बीडीओ महेशपुर सिद्धार्थ शंकर यादव ने उनके स्ट्रॉबेरी की खेती का अवलोकन किया है और उनका उत्साहवर्धन करते हुए किसान को विभाग से और भी अधिक लाभ देने को लेकर आश्वासन दिया है. किसान जोएल ने बताया कि वे बीते साल प्रशिक्षण व भ्रमण के लिए संस्था के माध्यम से रांची गया हुआ था. जहां रांची भ्रमण के दौरान वहां की खेतों में स्ट्रॉबेरी की फसल देखी थी. जिससे प्रेरित होकर मैंने इसकी खेती का निर्णय लिया. वहां के किसान व विभाग के अधिकारियों से इसकी खेती की पूरी जानकारी ली. फिर वापस आकर मिट्टी की जांच करवाई. उसके बाद नवाड और जेएसएलपीएस के माध्यम से पूरे गांव में 12 लोगों को स्टोबरी का बीज मिला. मैने पहली बार अपने आठ कट्ठे खेत में स्ट्रॉबेरी लगवाया. पहली बार स्ट्रॉबेरी की खेती करने में कुछ परेशानियां भी आई. कई किसानों ने उपहास उड़ाया. लेकिन मेरा प्रयोग सफल रहा और स्ट्रॉबेरी के फल आमदनी देने लगा. उन्होंने बताया कि इस पहाड़ी इलाके में पानी पटाने को लेकर मुश्किलें आ रही है. नवाड से हमको पंप सेट दिया गया था लेकिन उसमें काम नहीं हो पा रहा है. यहां खेती के लिए उससे बड़ा पंप सेट चाहिए ताकि फसल में जल्दी पानी पटा सकें. बताया कि भविष्य में अन्य किसानों के साथ मिलकर बड़े पैमाने पर इसकी खेती करने की योजना है. यदि इस योजना में विभाग का सहयोग मिलता रहा तो हम किसानों की तकदीर बदल जाएगी. यह ठंड के मौसम में बेहतरीन कमाई देने वाला फसल है. किसान इसकी खेती कर बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं. वही किसान जोएल हांसदा की पत्नी सुभाषणी सोरेन ने बताया कि पौधा और तकनीक तथा सिंचाई की सुविधा सब नवाड व जेएसएलपीएस के माध्यम से कराया गया है. बताया कि वे अपने पति के साथ-साथ सभी परिवार के सदस्य व बच्चे भी इस खेती में अपना-अपना हाथ बटाते है. बताया कि पिछले 20 नवंबर 2023 को स्टोबरी का फसल लगाया गया था. दो महीने के अंदर ही फल निकल गया और स्ट्रॉबेरी को बेचने के लिए बाहर में जाने का मौका ही नहीं लग पाता है, क्योंकि ज्यादातर स्टोबरी खेत से ही बिक जाते हैं. बताया कि स्ट्रॉबेरी अच्छी उत्पादन के साथ-साथ अच्छी आय भी प्राप्त हो रही है.

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