बिचौलिए ने निकाल लिए अवैध तरीके से पीएम आवास की राशि।
पाकुड़ नवीनगर पंचायत के सलपत्रा गांव में भी कई पीएम आवास कई सालों से आधे अधूरे बना कर बिचौलिया द्वारा छोड़ दिया गया है।
एस कुमार
देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सबसे महत्वाकांक्षी योजना प्रधानमंत्री आवास योजना महेशपुर प्रखंड में भ्रष्टाचार की भेंट चढ़ गई है. प्रखंड के शहरग्राम पंचायत अंतर्गत खेड़ीबाड़ी गांव में पीएम आवास लाभुक को मिलने वाले पैसे को पंचायत के एक छोटे कर्मी व ठीकेदार के द्वारा अधिकारियों से साठगांठ कर आवास को पूर्ण दिखाकर सब पैसा ले लिया गया है. जिसकी वजह से लाभुक का आवास पूर्ण नहीं हो पाया, जबकि सरकारी रिकॉर्ड में आवास पूर्ण होना बताकर अंतिम किस्त भी निकाल ली गई है. वहीं पीड़ित परिवार परेशान होकर गांव में ही अपने रिश्तेदार के यहां छप्पर लगाकर रहने को मजबूर है. बताते चलें कि जिले में आदिवासियों के साथ हो रहे भ्रष्टाचार थमने का नाम नहीं ले रहा है. महेशपुर प्रखंड के शहरग्राम पंचायत के खेड़ीबाड़ी गांव में एक ऐसा ही मामला सामने आया है. जो पूरे सरकारी सिस्टम पर सवाल खड़े कर रहा है. इस गांव के लाभुक चुड़की मरांडी को कागजों में पीएम आवास मिल चुका है, लेकिन हकीकत में आवास अधूरे पड़े हैं. वही पीड़ित लाभुक चुड़की मरांडी ने कहा कि वर्ष 2020-21 में पीएम आवास योजना स्वीकृत हुई थी. जिसका योजना संख्या JH2416782 है. जहां पंचायत के स्वयं सेवक सहित अन्य कर्मियों के द्वारा लाभुक के घर का जियोटैग व फ़ोटो किया गया था. इसके बाद खेड़ीबाड़ी गांव के ही ठीकेदार जुगिन सोरेन इंडियन बैंक से एक के बाद एक क़िस्त निकालकर सारा पैसा निकाल लिया गया. पीड़िता ने कहा कि पंचायत के कर्मी और ठीकेदार मिलकर मुझे गुमराह कर पीएम आवास योजना का सभी कागजात ले लिया गया है मेरे पास एक भी आवास योजना से संबंधित कागजात नहीं है. और पीएम आवास का कुल राशि ठीकेदार जुगिन सोरेन ने लिया है लेकिन आवास को पूर्ण नहीं किया गया है. कहा कि आवास निर्माण करने के समय हम सभी परिवार मिलकर मिट्टी भरने से लेकर सभी कार्य किया था. कहा कि ठीकेदार जुगिन सोरेन आवास निर्माण के समय से ही गुणवत्ता का ख्याल नहीं रख रहा था. ठीकेदार ने पांच इंच ईटा का जोड़ाई कर रहा था. जो आज टुटटूटकर गिर रहा है. और ना ही ढलाई कराया गया. पीड़िता ने कहा कि ठीकेदार को कई बार आवास निर्माण को लेकर कहा गया लेकिन ठीकेदार हमारी एक भी बात सुनने को नहीं है. बल्कि पंचायत के कर्मियों के कहने पर चार- पांच लोग मिलकर मेरा घर आकर उल्टा हमसे ही 20-30 हजार मांग करता है. पीडीता ने कहा कि उसके पति कमल टुडू उर्फ कालो टुडू समेत दो बच्चे है. वे लोग पश्चिम बंगाल के ईटा भट्ठा में मजदूरी का काम करते हैं. कहा कि सरकार द्वारा आवास स्वीकृत तो हुई लेकिन आवास का सपना सपना ही रह गया. कहा कि अब मजदूरी कर ठीकेदार को कैसे 20-30 हजार दें. वही पीड़ित परिवार ने पंचायत के मुखिया से भी शिकायत की लेकिन आदिवासी पीड़ित परिवार को अपने आशियाने को लेकर खाली हाथ ही लौटना पड़ा. वही पीड़ित परिवार ने सरकार व जिला प्रशासन से तीन वर्ष से अधूरे पड़े पीएम आवास को बना देने की गुहार लगाई है.
क्या कहते हैं महेशपुर बीडीओ
इस संबंध में महेशपुर बीडीओ सिद्धार्थ शंकर यादव से दूरभाष पर जानकारी लेने पर उन्होंने बताया कि यह मामला पुराना मामला है, जो मेरे संज्ञान में नहीं है. बताया कि उक्त मामले को लेकर जांच कराई जाएगी.





