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October 13, 2026 1:29 am

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय झिरनियां के शिक्षक विद्यालय में आते तो हैं सिर्फ मोबाइल चलाने के लिए

बच्चे का भविष्य लटका अधर में, शिक्षक हाजरी बना रहते हैं मोबाइल चलाने में बिजी

मोबाइल में बिजी रहने वाले शिक्षकों को आखिर क्यों नहीं होती है ऐसे शिक्षकों पर कार्रवाई

सरकारी रुपये लेकर पारा शिक्षक रहते मग्नमस्त, बच्चे जाय भांड में

उ. प्रा. वि. झिरनिया स्कूल का शौचालय नहीं एक मौत का गुफ़ा हैं।

बिनोद कुमार, चतरा जिला ब्यूरो

चतरा /लावालौंग : लावालौंग प्रखण्ड के उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय झिरनियां में इन दिनों विद्यालय में शिक्षक मोबाइल चलाने में रहते है मगनमस्त जिससे बच्चे का भविष्य अधर में लटक रहा है। शिक्षक विद्यालय तो आते हैं किंतु केवल हाजरी बना होते हैं मोबाइल में बिजी आपको बता दें कि उक्त विद्यालय में दो पारा शिक्षक बालगोविंद यादव, जगदीश यादव पदस्थापित हैं जहां विद्यालय में करीब 60 का नामंकन मौजूद हैं। फिर भी शिक्षकों की मनमानी है ।अपनी मर्जी से आते हैं और हाजरी बना अपनी मर्जी से बच्चों को पढ़ने के लिए छोड़ दीया जाता है। जिसके कारण बच्चे तो विद्यालय आते हैं लेकिन विद्यालय में पढ़ाई नहीं होने के कारण बच्चे वापस घर चले जाते हैं। जहां ना सेविका रहती है ना सहायिका ।दोनों के दोनों गायब रहती है। और जानता को बोलने में कहती हैं परमानेंट हों गया अब कोई नहीं हटा सकता हैं।सरकारी रुपये का दोहन किया जा रहा है। आखिर क्यों नहीं सुदूरवर्ती क्षेत्र होने के कारण पदाधिकारी उक्त क्षेत्र में जाते नहीं है ना उन पर कोई कार्रवाई करते है जिसका नतीजा है कि चाहे विद्यलाय हो या आंगनबाड़ी दोनों मनमर्जी पढ़ाया जाता है। बता दें कि बच्चों को पढ़ाने के लिए झारखण्ड सरकार को करोड़ो रूपये तनख्वाह से लेकर अन्य सामग्रियों में खर्च हो रही है ।फिर भी इतने खर्च होने बावजूद भी बच्चों को पढाई से दूर रखा जाना यह दुर्भाग्य है। आखिर इसका जिम्मेवार कौन। क्या ऐसे लोंगों पर कोई ठोस कानूनी कार्रवाई होगी। ग्रामीणों का कहना है कि हम लोगों को बोलने पर उल्टे कई तरह के बात करते है। वैसे में बोलना उचित नहीं है। चुकी कोई ग्रामीणों की बात सुनने वाला नहीं है।

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