चैनपुर अंचल कार्यालय में 29 एकड़ भूमि हेराफेरी का आरोप, घुसपैठी भू-माफियाओं और अधिकारियों की मिलीभगत पर उठे सवाल
चैनपुर: पलामू जिले के चैनपुर अंचल कार्यालय एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में आ गया है। स्थानीय लोगों और पत्रकारों के अनुसार, यहां जमीन से जुड़े मामलों में भारी अनियमितता और हेराफेरी का खेल चल रहा है, जिसमें नीचे से लेकर ऊपर तक अधिकारियों की मिलीभगत होने की आशंका जताई जा रही है।
बताया जा रहा है कि वर्ष 2023 से लंबित आवेदनों पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। वहीं 24 तारीख को दाखिल की गई आरटीआई भी कार्यालय में ही फाइलों के बीच पड़ी मिली,जिससे यह साफ संकेत मिलता है कि सूचना देने में भी लापरवाही बरती जा रही है।
जब एक पत्रकार द्वारा कार्यालय पहुंचकर पुराने आवेदनों और आरटीआई की स्थिति की जानकारी मांगी गई, तो अधिकारियों ने संतोषजनक जवाब देने से बचने की कोशिश की। इससे यह सवाल उठता है कि आखिर किस दबाव या कारण से मामलों को दबाया जा रहा है।
चाय की दुकानों तक बन गई चर्चा
स्थानीय स्तर पर यह मुद्दा इतना गर्म हो चुका है कि चाय की दुकानों पर भी लोग खुलकर चर्चा कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि चैनपुर अंचल कार्यालय में बिना “सेटिंग” के कोई काम नहीं होता और कई मामलों में जानबूझकर फाइलें लटका दी जाती हैं।
सुप्रीम कोर्ट में मामला, फिर भी जमीन ट्रांसफर?
सबसे गंभीर बात यह सामने आई है कि जिस जमीन को लेकर विवाद पहले से ही सुप्रीम कोर्ट में लंबित है, उसी जमीन का कथित तौर पर बिना नोटिस दिए ट्रांसफर कर दिया गया। यह न सिर्फ प्रशासनिक नियमों का उल्लंघन है, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया की भी अवहेलना मानी जा सकती है।
नरसिंहपुर पथरा बना भू-माफियाओं का गढ़
स्थानीय लोगों का आरोप है कि नरसिंहपुर पथरा क्षेत्र में भू-माफियाओं का नेटवर्क तेजी से फैल चुका है। खाली जमीनों पर अवैध कब्जा करना और कागजों में हेराफेरी कर मालिकाना हक बदलना आम बात हो गई है।
कुछ भू-माफिया इतने बेखौफ हो चुके हैं कि उन्हें न प्रशासन का डर है और न ही कानून का। यहां तक कि विधानसभा में मामला उठने के बावजूद वे इसे मजाक के रूप में ले रहे हैं।
मीडिया से दूरी बना रहे अधिकारी
जब मीडिया द्वारा अधिकारियों से संपर्क कर प्रतिक्रिया लेने की कोशिश की गई, तो उन्होंने मिलने से इनकार कर दिया। यह रवैया भी संदेह को और गहरा करता है, क्योंकि आमतौर पर पारदर्शी प्रशासन सवालों से भागता नहीं है।
बड़ा सवाल: 29 एकड़ जमीन कैसे गायब?
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर 29 एकड़ जैसी बड़ी भूमि का मालिकाना हक कैसे बदल गया? बिना उचित प्रक्रिया, नोटिस और जांच के यह संभव नहीं है। इससे यह स्पष्ट संकेत मिलता है कि कहीं न कहीं बड़ा खेल चल रहा है।
निष्कर्ष: जांच की मांग तेज झारखंड सरकार से
अब यह मामला सिर्फ स्थानीय स्तर तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसकी उच्चस्तरीय जांच की मांग उठने लगी है। यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो चैनपुर अंचल कार्यालय आम जनता के लिए नहीं, बल्कि घुसपैठी भू-माफियाओं का अड्डा बन सकता है।
सरकार और प्रशासन से मांग की जा रही है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों पर सख्त कार्रवाई की जाए, ताकि आम जनता का विश्वास बहाल हो सके।
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