पाकुड़: झारखंड के पूर्व मंत्री और भाजपा के कद्दावर नेता रणधीर सिंह ने पाकुड़ में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान वर्तमान राज्य सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए राज्य में “सुशासन” के अंत और “लूट के शासन” की शुरुआत होने का गंभीर आरोप लगाया।
181 टोल-फ्री नंबर और सुशासन का दिया हवाला
रणधीर सिंह ने रघुवर दास सरकार के कार्यकाल को याद करते हुए कहा कि उस समय 181 टोल-फ्री नंबर के माध्यम से जनता सीधे अपनी शिकायतें दर्ज कराती थी।उन्होंने साझा किया कि एक मंत्री होने के बावजूद, उनके खिलाफ भी चार-पांच बार शिकायतें आई थीं, जिस पर तत्कालीन मुख्यमंत्री ने उनसे जवाब मांगा था। उन्होंने कहा, “उस समय मंत्रियों और अधिकारियों में डर था और जनता को लगता था कि कोई सुनने वाला है, लेकिन आज स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है।”
ट्रांसफर-पोस्टिंग को बताया “उद्योग”
पूर्व मंत्री ने राज्य में अधिकारियों के तबादलों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि झारखंड में अब ट्रांसफर-पोस्टिंग का उद्योग चल रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बड़े पैमाने पर डीसी (DC) और एसपी (SP) का तबादला सिर्फ स्वार्थ सिद्धि के लिए किया जा रहा है।देवघर जैसे जिलों में बेहतर काम करने वाले अधिकारियों को मात्र कुछ महीनों में हटा दिया गया।उन्होंने दुमका का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां के अधिकारियों को नहीं बदला गया क्योंकि वहां “छोटे सरकार” (बसंत सोरेन) का प्रभाव है।
भ्रष्ट अधिकारियों को मिल रहा संरक्षण
रणधीर सिंह ने बेहद गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि वर्तमान सरकार ईमानदार अधिकारियों को साइडलाइन कर रही है और चाटुकार” व “भ्रष्ट अधिकारियों को महत्वपूर्ण पदों पर तैनात कर रही है। उन्होंने कहा कि लगभग 80% प्रमोटेड आईएएस और आईपीएस अधिकारियों को फील्ड में लगाया गया है, जबकि डायरेक्ट कैडर के अधिकारियों को दरकिनार कर दिया गया है।
संथाल परगना बना माफियाओं का चारागाह
संथाल परगना की स्थिति पर चिंता व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि आज यह क्षेत्र अवैध पत्थर, बालू और कोयला माफियाओं का चारागाह बन चुका है। उन्होंने सरकार के ‘अबुआ राज’ (अपना राज) के नारे पर कटाक्ष करते हुए इसे ‘बबुआ राज’ करार दिया और कहा कि यह सरकार जल-जंगल-जमीन की रक्षा करने के बजाय उसे लूटने में लगी है।






