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May 28, 2026 12:57 pm

पाकुड़ में अकीदत व उत्साह के साथ मनाई जा रही बकरीद, ईदगाहों में गूंजी अमन-चैन की दुआ

इस्लाम का मूल संदेश है त्याग और इंसानियत: मौलाना अब्दुल रब

पाकुड़: कुर्बानी और समर्पण का प्रतीक पर्व ईद-उल-अजहा (बकरीद) गुरुवार को पाकुड़ जिले भर में पूरे अकीदत, अदब और धार्मिक उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। सुबह से ही पाकुड़ शहर समेत ग्रामीण इलाकों की विभिन्न ईदगाहों और मस्जिदों में नमाजियों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी, जहां सामूहिक रूप से ईद की विशेष नमाज अदा की गई। रंग-बिरंगे परिधानों में सजे बच्चों, युवाओं और बुजुर्गों ने एक-दूसरे को गले लगाकर बकरीद की मुबारकबाद दी।

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देश में अमन-चैन के लिए उठीं हजारों हाथ

पाकुड़ सदर प्रखंड के चेंगाडांगा, सीतापहाड़ी, ईलामी, झिगरहटी, फरसा और रहसपुर सहित तमाम गांवों की ईदगाहों व मस्जिदों में नमाज की रस्म पूरी की गई। चेंगाडांगा जुम्मा मस्जिद के इमाम मौलाना अब्दुल रब और वाकतिया मस्जिद के इमाम समाउल इस्लाम ने मुकद्दस नमाज अदा कराई।मौलाना समाउल इस्लाम ने बताया कि नमाज के दौरान खुदा की बारगाह में हजारों हाथ उठे और पूरे देश में अमन, चैन, भाईचारे व खुशहाली की दुआ मांगी गई।

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इस्लाम का मूल संदेश है त्याग और इंसानियत: मौलाना अब्दुल रब

नमाज के बाद खुतबा पढ़ते हुए इमाम मौलाना अब्दुल रब ने बकरीद के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह त्योहार आत्मसमर्पण और अल्लाह की राह में सर्वोच्च बलिदान का संदेश देता है।उन्होंने कहा कि बकरीद का यह पावन पर्व हमें अल्लाह की रजा के लिए अपना सब कुछ न्योछावर करने की सीख देता है।हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत हमें याद दिलाती है कि समाज और इंसानियत की भलाई के लिए त्याग से कभी पीछे नहीं हटना चाहिए।
मौलाना अब्दुल रब ने नमाजियों से अपील करते हुए कहा कि कुर्बानी सिर्फ एक रस्म नहीं, बल्कि अपने भीतर के अहंकार, नफरत और बुराइयों को खत्म करने का संकल्प है। इस्लाम का मूल संदेश ही शांति, मोहब्बत और इंसानियत की सेवा है।उन्होंने आगे कहा कि त्योहार की असली खुशी तब है जब हम अपने गरीब और जरूरतमंद भाइयों को भी अपनी खुशियों में शामिल करें। उन्होंने सभी अकीदतमंदों से शांतिपूर्ण तरीके से त्योहार मनाने और साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखने की भी गुजारिश की।

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नमाज के बाद दी गई कुर्बानी

ईदगाहों से नमाज अदा कर लौटने के बाद मुस्लिम धर्मावलंबियों ने पैगंबर हजरत इब्राहिम अलैहिस्सलाम की सुन्नत (परंपरा) को निभाते हुए अल्लाह की राह में बकरे और अन्य पशुओं की कुर्बानी दी। इसके बाद कुर्बानी के गोश्त को सुन्नत के मुताबिक तीन हिस्सों में बांटा गया—एक हिस्सा गरीबों के लिए, दूसरा हिस्सा रिश्तेदारों व दोस्तों के लिए और तीसरा हिस्सा खुद के लिए रखा गया। त्योहार को लेकर घरों में विशेष पकवान और लजीज व्यंजन बनाए गए, जहां लोगों ने अपने दोस्तों और शुभचिंतकों का स्वागत किया।

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सुरक्षा के रहे पुख्ता इंतजाम, पुलिस रही मुस्तैद

बकरीद के मद्देनजर पाकुड़ जिला प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट मोड पर नजर आई। जिले भर के सभी संवेदनशील मोर्चों, मस्जिदों और ईदगाहों के बाहर पाकुड़ पुलिस के द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे।सभी प्रमुख ईदगाहों और चौराहों पर दंडाधिकारियों के साथ अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी।असामाजिक तत्वों और सोशल मीडिया पर कड़ी निगरानी रखने के लिए विशेष सेल को सक्रिय रखा गया।शांति समिति की बैठकों के बाद प्रशासनिक अधिकारी सुबह से ही खुद क्षेत्र में गश्त करते दिखे, ताकि शांति व सौहार्द का माहौल बना रहे।खबर लिखे जाने तक पूरे जिले से त्योहार के शांतिपूर्ण और भाईचारे के माहौल में मनाए जाने की सूचना है। ग्रामीण से लेकर शहरी क्षेत्रों तक उत्सव का माहौल देखा जा रहा है।

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