नसीपुर स्थित आंगनवाड़ी केंद्र की दुर्दशा से अभिभावक व ग्रामीण चिंतित
नाम ‘मॉडल’ का, पर बुनियादी सुविधाओं के अभाव और जर्जर दीवार-छत के बीच पढ़ने को मजबूर हैं नौनिहाल
पाकुड़: एक तरफ जहां सरकार बच्चों के बेहतर भविष्य, पोषण और प्राथमिक शिक्षा के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों को आधुनिक और सुदृढ़ बनाने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी तरफ धरातल पर सच्चाई इसके बिल्कुल उलट नजर आ रही है। प्रखंड क्षेत्र के नसीपुर (पश्चिम) पंचायत स्थित ‘मॉडल आंगनवाड़ी नर्सरी प्री-स्कूल केंद्र’ प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। नाम भले ही इसका ‘मॉडल’ रखा गया है, लेकिन इसकी इमारत अब खुद बदहाली के आंसू बहा रही है।
जर्जर भवन और लटकती काई बनी पहचान
केंद्र की हालत यह है कि भवन की बाहरी दीवारों का प्लास्टर उखड़ चुका है और ईंटें बाहर निकल आई हैं। छत के छज्जों पर जमा काई और जड़ी-बूटियों के पौधे इसकी कई सालों से मरम्मत न होने की गवाही दे रहे हैं। बरसात के दिनों में छत से पानी टपकने और छज्जे का मलबा गिरने का डर लगातार बना रहता है।

40 नौनिहालों के सिर पर मंडरा रहा खतरा
इस केंद्र में कुल 40 छोटे-छोटे बच्चे नामांकित हैं, जो रोज प्राथमिक शिक्षा और पोषण आहार के लिए यहाँ आते हैं। लेकिन भवन की ऐसी खतरनाक स्थिति के कारण हर समय किसी अनहोनी का डर बना रहता है। बच्चों के अभिभावक रोजाना उन्हें केंद्र भेजते समय किसी बड़े हादसे की आशंका से सशंकित रहते हैं।
दीवारों पर लिखे निर्देश, पर धरातल पर अव्यवस्था
केंद्र की बदरंग हो चुकी दीवारों पर योजनाओं, जैसे *सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना’ और सेविका-सहायिका के नाम व संपर्क सूत्र तो लिखे हैं, लेकिन भवन की ढांचागत स्थिति को सुधारने की ओर किसी जिम्मेदार अधिकारी का ध्यान नहीं है। केंद्र पर कार्यरत सेविका बंदना साहा एवं सहायिका फातेमा बीबी विपरीत परिस्थितियों और भय के साये के बीच केंद्र का संचालन करने को मजबूर हैं।

क्या कहती हैं सेविका?
सेबीका बंदना साहा ने बताया कि 40 मासूम बच्चों को रोज केंद्र भेजते समय मन में डर लगा रहता है कि कहीं छत का कोई हिस्सा गिर न जाए। नाम ‘मॉडल’ रख देने से केंद्र मॉडल नहीं बन जाता, सरकार और प्रशासन को बच्चों की सुरक्षा देखते हुए इसकी जल्द से जल्द मरम्मत करानी चाहिए। कई बार सीडीपीओ को आवेदन दे चुके हैं लेकिन कोई सुनने को तैयार नहीं है।
अधिकारियों के आश्वासन का इंतजार
स्थानीय ग्रामीणों और अभिभावकों ने प्रशासन व संबंधित बाल विकास परियोजना अधिकारी (CDPO) से जल्द से जल्द इस जर्जर भवन का जीर्णोद्धार कराने या इसे किसी सुरक्षित स्थान पर स्थानांतरित करने की मांग की है, ताकि इन 40 मासूम बच्चों को सुरक्षित माहौल में शिक्षा और पोषण मिल सके।







