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August 8, 2026 9:12 pm

फॉर्म-16 के भरोसे ITR न भरें, छोटी चूक भी पड़ सकती है भारी।

AIS, TIS और 26AS से आय-लेनदेन का मिलान जरूरी, गलत जानकारी पर आ सकता है आयकर विभाग का नोटिस।

राजकुमार भगत

पाकुड़। आयकर रिटर्न दाखिल करना अब महज एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रह गया है। डिजिटल निगरानी के बढ़ते दौर में आय की छोटी-सी जानकारी छूटना या गलत विवरण दर्ज करना भी करदाता के लिए भारी पड़ सकता है। ऐसे में नौकरीपेशा लोगों के साथ छोटे कारोबारी और स्वरोजगार करने वाले करदाताओं को ITR दाखिल करने से पहले अपनी पूरी आय और वित्तीय लेनदेन का मिलान करना बेहद जरूरी है। यह जानकारी पाकुड़ के आयकर अधिवक्ता प्रमोद कुमार सिन्हा ने दी। उन्होंने बताया कि कई वेतनभोगी करदाता केवल फॉर्म-16 को आधार बनाकर ITR दाखिल कर देते हैं, जबकि फॉर्म-16 में मुख्य रूप से नियोक्ता से प्राप्त वेतन और काटे गए TDS की जानकारी होती है। इसमें नौकरी के अलावा होने वाली हर आय का विवरण जरूरी नहीं होता। ऐसे में बैंक और FD का ब्याज, बचत खाते का ब्याज, डिविडेंड, फ्रीलांसिंग की आय, किराये से प्राप्त रकम तथा शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश की बिक्री से हुए कैपिटल गेन्स का सही हिसाब रखना जरूरी है।

AIS, TIS और 26AS से करें मिलान

अधिवक्ता सिन्हा ने कहा कि ITR दाखिल करने से पहले फॉर्म-16 की जानकारी का मिलान फॉर्म 26AS, Annual Information Statement (AIS) और Taxpayer Information Summary (TIS) से जरूर करना चाहिए। इन रिकॉर्ड में दर्ज किसी आय या वित्तीय लेनदेन को रिटर्न में शामिल नहीं करने पर भविष्य में आयकर विभाग की ओर से स्पष्टीकरण मांगा जा सकता है। इसलिए बैंक स्टेटमेंट, निवेश विवरण और आयकर विभाग के डिजिटल रिकॉर्ड की जांच जरूरी है।

पुरानी या नई टैक्स व्यवस्था, सोच-समझकर करें चुनाव

उन्होंने कहा कि पुरानी और नई टैक्स व्यवस्था में से चुनाव भी बिना तुलना किए नहीं करना चाहिए। करदाता की आय, निवेश, HRA, LTA, होम लोन ब्याज और उपलब्ध कटौतियों के आधार पर टैक्स देनदारी अलग हो सकती है। इसलिए ITR दाखिल करने से पहले दोनों व्यवस्थाओं के तहत संभावित टैक्स देनदारी की तुलना करना बेहतर होगा।

कारोबारियों को भी रखनी होगी पूरी जानकारी

सावधानी केवल नौकरीपेशा लोगों के लिए नहीं, बल्कि ऑडिट के दायरे में नहीं आने वाले छोटे कारोबारियों और स्वरोजगार करने वालों के लिए भी उतनी ही जरूरी है। बैंकिंग लेनदेन, ब्याज, निवेश, संपत्ति से होने वाली आय और अन्य प्राप्तियों का सही विवरण रखना चाहिए। किसी आय या लेनदेन को नजरअंदाज करना बाद में परेशानी का कारण बन सकता है।
अधिवक्ता प्रमोद कुमार सिन्हा ने करदाताओं से अपील की कि ITR दाखिल करने से पहले फॉर्म-16, बैंक स्टेटमेंट, निवेश विवरण, AIS, TIS और 26AS का मिलान जरूर करें। किसी तरह का अंतर मिलने पर रिटर्न दाखिल करने से पहले उसकी वजह स्पष्ट कर लें और आवश्यक होने पर संबंधित स्रोत से सुधार कराएं। डिजिटल टैक्स निगरानी के दौर में सही जानकारी के आधार पर रिटर्न दाखिल करना ही नोटिस, ब्याज और अतिरिक्त कर देनदारी से बचने का सबसे सुरक्षित तरीका है।

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