पाकुड़ जिले में मोहर्रम का त्योहार अकीदत, श्रद्धा और शांतिपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ। इस अवसर पर शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक विभिन्न अखाड़ों और कमेटियों द्वारा आकर्षक ताजिया और जुलूस निकाला गया। सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जिला एवं पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया।

आपसी भाईचारे की मिसाल है मोहर्रम: एसडीपीओ
जुलूस के दौरान विधि-व्यवस्था का जायजा लेने पहुंचे एसडीपीओ कुमार गौरव ने मौके पर उपस्थित लोगों को संबोधित किया। उन्होंने कहा पाकुड़ में मोहर्रम का पर्व बेहद शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण माहौल में मनाया जा रहा है। इस त्योहार में सभी समुदाय के लोगों की सक्रिय भागीदारी देखी जा रही है। हिंदू और मुस्लिम दोनों ही समाज के लोग मिलकर इस दिन को एक फ्रेंड्स (मित्र) की तरह मना रहे हैं। प्रशासन को पूरी उम्मीद है कि आगे भी पूरा कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न होगा।उन्होंने आगे कहा कि मोहर्रम के मद्देनजर विशेष निर्देश जारी किए गए हैं। किसी भी व्यक्ति को नशा करके जुलूस या मोहर्रम के किसी भी कार्यक्रम में शामिल होने की अनुमति नहीं है। सभी कमेटियों को सरकारी गाइडलाइंस का सख्ती से पालन करने का निर्देश दिया गया है।

अमन, चैन और इंसानियत का पैगाम देता है यह दिन: हाजी तनवीर आलम
वहीं, मौके पर उपस्थित प्रमुख समाजसेवी हाजी तनवीर आलम ने मोहर्रम के ऐतिहासिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा मोहर्रम कोई जश्न या पर्व नहीं, बल्कि यह एक पावन महीने का नाम है। आज के ही दिन मोहम्मद साहब के नवासे (हजरत इमाम हुसैन) को कर्बला के मैदान में यजीद के सैनिकों द्वारा बेरहमी से कत्ल कर शहीद कर दिया गया था। उन्होंने दुनिया को यह पैगाम दिया कि अपना सर कटाकर भी हक और इंसाफ की जंग जीती जा सकती है।हाजी तनवीर आलम ने आगे कहा, आज यजीद को मरे हुए 14000 वर्ष से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन दुनिया में उसका नाम लेने वाला कोई नहीं है। इसके विपरीत, इमाम हुसैन का नाम लेने वाले आज करोड़ों की तादाद में मौजूद हैं। जब भी मोहर्रम का महीना और 10 तारीख (आशूरा) आती है, हुसैन के नाम पर लोगों के दिलों में एक अजीब सी हरारत (तड़प) पैदा हो जाती है, और इसी भाव के साथ हम जुलूस और मातम मनाते हैं। यह जंग अमन, चैन, इंसानियत और बराबरी के लिए थी, और हम सभी मोहम्मद साहब और हुसैन साहब के इसी पैगाम पर चल रहे हैं।”

ताजिया चौक पर बच्चों ने दिखाए हैरतअंगेज करतब
मोहर्रम के जुलूस के दौरान शहर का मुख्य ताजिया चौक आकर्षण का केंद्र बना रहा। यहाँ विभिन्न अखाड़ों के छोटे-छोटे बच्चों ने पारंपरिक हथियारों, लाठी और डंडों के साथ हैरतअंगेज पारंपरिक कला और करतब दिखाए, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ी। जुलूस में शामिल लोग मजहबी नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, अलर्ट पर प्रशासन
जिला प्रशासन मोहर्रम को शांतिपूर्वक संपन्न कराने के लिए पूरी तरह अलर्ट मोड पर दिखा। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बलों की तैनाती की गई थी। जुलूस के रूट पर पैनी नजर रखने के लिए पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ लाठीधारी बल और त्वरित कार्रवाई बल (QRT) भी मुस्तैद रहे, ताकि किसी भी प्रकार की अप्रिय घटना को रोका जा सके।







