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June 30, 2026 8:26 am

कृषि आदान विक्रेताओं एवं ग्रामीण युवाओं हेतु 15 दिवसीय समेकित पोषक तत्व प्रबंधन प्रशिक्षण हुआ संपन्न

कृषि विज्ञान केन्द्र, रामगढ़ में कृषि आदान विक्रेताओं (इनपुट डीलर्स) एवं ग्रामीण युवाओं के लिए 15 जून से 29 जून 2026 तक आयोजित 15 दिवसीय समेकित पोषक तत्व प्रबंधन प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।

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कार्यक्रम का उद्देश्य कृषि आदान विक्रेताओं एवं ग्रामीण युवाओं की तकनीकी दक्षता बढ़ाना तथा किसानों तक संतुलित पोषण प्रबंधन की वैज्ञानिक जानकारी प्रभावी ढंग से पहुंचाने हेतु उन्हें सक्षम बनाना था। प्रशिक्षण में 40 कृषि आदान विक्रेताओं एवं ग्रामीण युवाओं ने भाग लिया । कार्यक्रम के पाठ्यक्रम निदेशक एवं कृषि विज्ञान केन्द्र, रामगढ़ के वरिष्ठ वैज्ञानिक सह प्रधान डॉ. सुधांशु शेखर ने अपने संबोधन में कहा कि वर्तमान समय में कृषि उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ मृदा स्वास्थ्य का संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि असंतुलित उर्वरक उपयोग से मिट्टी की उर्वरता एवं गुणवत्ता प्रभावित हो रही है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ने के साथ-साथ पर्यावरणीय समस्याएं भी उत्पन्न हो रही हैं। उन्होंने रासायनिक, जैविक एवं जैव उर्वरकों के संतुलित उपयोग पर आधारित समेकित पोषक तत्व प्रबंधन को टिकाऊ कृषि की आवश्यकता बताया।

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उन्होंने कृषि आदान विक्रेताओं एवं ग्रामीण युवाओं को किसानों और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच महत्वपूर्ण सेतु बताते हुए कहा कि यदि वे मृदा परीक्षण आधारित उर्वरक अनुशंसा, मृदा स्वास्थ्य कार्ड तथा संतुलित पोषण प्रबंधन की सही जानकारी किसानों तक पहुंचाएं, तो कृषि उत्पादन एवं किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि संभव है । प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान कुल 44 तकनीकी सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें 32 सैद्धांतिक तथा 12 व्यावहारिक सत्र शामिल थे। इन सत्रों में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के विभिन्न संस्थानों तथा बिरसा कृषि विश्वविद्यालय, रांची के वैज्ञानिकों एवं विशेषज्ञों ने संसाधन व्यक्तियों के रूप में भाग लेकर प्रतिभागियों को नवीनतम वैज्ञानिक जानकारी प्रदान की। प्रशिक्षण में मृदा स्वास्थ्य, पौध पोषण, उर्वरक प्रबंधन, जैव उर्वरक, कार्बनिक खाद, सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा परीक्षण, पोषक तत्वों की कमी की पहचान तथा विभिन्न फसलों में समेकित पोषक तत्व प्रबंधन की उन्नत तकनीकों पर विस्तार से चर्चा की गई । प्रशिक्षण समन्वयक, डॉ. इन्द्रजीत कुमार, विषय वस्तु विशेषज्ञ (कृषि प्रसार), ने प्रशिक्षण की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए बताया कि व्यावहारिक सत्रों में प्रतिभागियों को मृदा नमूना संग्रहण, मृदा परीक्षण रिपोर्ट की व्याख्या, उर्वरक अनुशंसा, जैव उर्वरकों के उपयोग तथा खेत स्तर पर पोषण प्रबंधन की तकनीकों का प्रत्यक्ष प्रशिक्षण दिया गया। इससे प्रतिभागियों को सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक अनुभव भी प्राप्त हुआ । प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वैज्ञानिकों के साथ संवाद कर अपनी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा क्षेत्रीय कृषि समस्याओं पर चर्चा की। प्रतिभागियों ने विशेष रूप से मृदा स्वास्थ्य कार्ड, सूक्ष्म पोषक तत्व प्रबंधन, जैविक स्रोतों के उपयोग तथा उर्वरक उपयोग दक्षता से संबंधित सत्रों को अत्यंत उपयोगी बताया । प्रतिभागियों की प्रतिक्रिया अत्यंत सकारात्मक रही। उन्होंने बताया कि प्रशिक्षण से पोषक तत्व प्रबंधन की वैज्ञानिक अवधारणाओं को बेहतर ढंग से समझने तथा किसानों को सटीक एवं वैज्ञानिक सलाह देने का आत्मविश्वास विकसित हुआ। कई प्रतिभागियों ने कहा कि अब वे मृदा परीक्षण रिपोर्ट, फसल की आवश्यकता एवं स्थानीय परिस्थितियों के आधार पर अधिक प्रभावी उर्वरक अनुशंसा करने में सक्षम होंगे। उन्होंने भविष्य में कीट एवं रोग प्रबंधन, बीज उत्पादन तथा प्राकृतिक खेती जैसे विषयों पर भी इसी प्रकार के प्रशिक्षण आयोजित करने का सुझाव दिया । समापन अवसर पर डॉ. सुधांशु शेखर ने सभी प्रतिभागियों को सफलतापूर्वक प्रशिक्षण पूर्ण करने पर बधाई देते हुए किसानों के बीच संतुलित पोषक तत्व प्रबंधन, मृदा स्वास्थ्य संरक्षण एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों के प्रसार में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशिक्षित कृषि आदान विक्रेता एवं ग्रामीण युवा अपने-अपने क्षेत्रों में किसानों के तकनीकी मार्गदर्शक बनकर कृषि विकास में महत्वपूर्ण योगदान देंगे । प्रशिक्षण कार्यक्रम के सफल संचालन में कृषि विज्ञान केन्द्र, रामगढ़ के डॉ. धर्मजीत खेरवार एवं सनी कुमार का योगदान विशेष रूप से सराहनीय रहा। कार्यक्रम के अंत में प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए गए तथा कृषि में संतुलित पोषण प्रबंधन एवं मृदा स्वास्थ्य संरक्षण को बढ़ावा देने का संकल्प दिलाया गया ।

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