सरकार की किसी भी योजना का लाभ नहीं मिलने का भी लगाया आरोप।
पाकुड़: नगर थाना क्षेत्र के चक बलरामपुर (हीरानंदनपुर) में रहने वाले अत्यंत गरीब घुमंतू समुदाय के दर्जनों परिवार सोमवार को न्याय की आस में समाहरणालय गेट के पास पहुंचे। हाथों में शिकायती पत्र लिए इन ग्रामीणों के चेहरों पर खौफ और बेबसी साफ झलक रही थी।पीड़ितों का आरोप है कि पुलिस उन्हें जबरन उजाड़ने का प्रयास कर रही है और जगह खाली नहीं करने की धमकी दे रही है। बिना किसी हंगामे या प्रशासनिक विरोध के, इन लोगों ने बेहद शांत तरीके से डीसी और एसपी के नाम अपनी गुहार लगाई।
क्या है पूरा मामला?
समाहरणालय गेट पर पहुंचे पीड़ितों ने बताया कि वे कुर्मी समाज के अत्यंत निर्धन और लाचार वर्ग से आते हैं। उनका कोई स्थायी रोजगार नहीं है; वे घूम-घूमकर जड़ी-बूटी बेचते हैं, चंदा मांगते हैं और भिक्षाटन कर किसी तरह अपने बच्चों का पेट पालते हैं। अपनी गाढ़ी कमाई और पाई-पाई जोड़कर उन्होंने इस जमीन को खरीदा था और यहीं झोपड़ी डालकर रह रहे हैं। उनकी तीन पीढ़ी पाकुड़ में गुजर बसर कर चुकी है।
पुलिस पर गंभीर आरोप, सामान फेंकने का दावा
वरिष्ठ अधिकारियों को सौंपे गए लिखित आवेदन में ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि पिछले करीब एक महीने से पुलिस के जवान उनके निवास स्थान पर रोज आ धमकते हैं।आते ही वे झोपड़ियों में रखा घरेलू सामान तितर-बितर करने की बात कहते हैं।
एक महीने में भाग जाओ
पीड़ितों ने आवेदन में लिखा है कि पुलिसकर्मी उन्हें सीधे तौर पर एक महीने के भीतर घर खाली कर कहीं और चले जाने का अल्टीमेटम दे रहे हैं।
सरकारी योजनाओं से भी महरूम है यह तबका
ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों के सामने अपना दुखड़ा रोते हुए कहा कि वे इस भीषण गरीबी में अपने छोटे-छोटे बच्चों को लेकर कहां जाएं? एक तरफ जहां सरकार हर गरीब को छत और राशन देने का दावा करती है, वहीं इस पीड़ित समुदाय का कहना है कि आज तक उन्हें झारखंड सरकार की किसी भी जनकल्याणकारी या विकास योजना का लाभ नहीं मिल सका है।
अंगूठा लगाकर दर्ज कराई अपनी मूक उपस्थिति
इस पूरे घटनाक्रम की सबसे खास बात यह रही कि इतनी बड़ी आरोप लगाने के बावजूद इस घुमंतू समुदाय ने कानून को हाथ में नहीं लिया।समाहरणालय परिसर के बाहर न तो कोई नारेबाजी हुई और न ही कोई प्रदर्शन। बेहद अनुशासित ढंग से 17 से अधिक ग्रामीणों ने आवेदन पत्र पर अपने अंगूठे का निशान लगाकर अपनी मूक उपस्थिति दर्ज कराई और अधिकारियों को अपनी अर्जी सौंपी। पीड़ितों ने डीसी और एसपी से इस आर्थिक, मानसिक और शारीरिक शोषण की निष्पक्ष जांच कराकर सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है।







