राहुल दास
हिरणपुर (पाकुड़): जनजाति सुरक्षा मंच के संथालपरगना प्रांत संयोजक सुलेमान मुर्मू ने रविवार को जामपुर स्थित जिला कार्यालय में आयोजित बैठक में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर विरोध जताया है।प्रान्त संयोजक ने कहा कि भारत के जनजाति सुरक्षा मंच के कार्यकर्ता नो अगस्त को आहूत आदिवासी दिवस को नही मानता है। यह दिवस संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा हमे थोपा गया है। उन्होंने कहा कि स्पेन देश के निवासी कोलम्बस जब वर्ष तीन अगस्त 1492 को भारत की खोज में निकले थे। वह 12 अक्टूबर 1492 को( सेंसल्लवडोर द्वीप) बाहमास देश पहुंचे थे। जहां की आदिवासियों की रहन सहन भारत के जैसा पाया था। जब वर्ष 1993 में अमेरिका के राष्ट्रपति बिल क्लिंटन बने , तब उन्होंने कोलम्बस डे के रूप में मनाने का निर्णय लिया गया था। जिसका संयुक्त राष्ट्र संघ के कार्यकारिणी समूह के सदस्यों ने विरोध जताया था। संयुक्त राष्ट्र संघ में वर्ष 1995 में विश्व आदिवासी दिवस को लेकर प्रस्ताव पारित कर मंजूरी दी गई थी व 2007 में सभी देशों की हस्ताक्षर के साथ घोषणा भी किया गया था ,पर भारत के आदिवासी हितो को लेकर निहित संविधान के अनुच्छेद 342 में उल्लेख रहने के कारण इस दिवस को तत्कालीन राजनेताओं ने नही माना । उन्होंने आगे कहा कि पश्चिमी सभ्यता व संस्कृति को हमे थोपने का प्रयास किया जा रहा था। वर्ष 2021 से केंद्र सरकार के द्वारा गौरव दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। जिससे कि देश के आदिवासी सभ्यता व संस्कृति अक्षुण्ण रह सके। देश की स्वतंत्रता आंदोलन में आदिवासी महापुरुषों ने जान न्योछावर कर दिया। वही मरांग बुरु , बिरसा मुंडा,सिदो कान्हू ,चांद भैरव,रानी दुर्गावती, मांझी थान आदि ने धर्म रक्षा को लेकर हमेशा आगे रहे व कठिन संघर्ष किया । इस अवसर पर मंच के प्रखण्ड संयोजक कमल सोरेन,मनु हांसदा,निर्मल बास्की,राजेश हांसदा नारायण किस्कु आदि उपस्थित थे।





