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August 18, 2026 11:21 pm

खनिज अधिकारों की लड़ाई को गांव-गांव तक ले जाएगा झामुमो, चार प्रखंडों में बैठकों में बनी आंदोलन की रणनीति।

पाकुड़। खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक-2026 के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने आंदोलन को धार देने की तैयारी शुरू कर दी है। मंगलवार को पाकुड़, हिरणपुर, अमड़ापाड़ा और महेशपुर प्रखंड में झामुमो प्रखंड समितियों की बैठक हुई। बैठकों में पार्टी नेताओं ने केंद्र सरकार की खनिज नीति का विरोध करते हुए विधेयक के खिलाफ प्रखंड से लेकर पंचायत और बूथ स्तर तक जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया। बैठकों में जिला स्तर से नियुक्त पर्यवेक्षकों ने कार्यकर्ताओं को विधेयक के प्रावधानों और उसके संभावित प्रभावों की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी दी। नेताओं ने कहा कि झारखंड खनिज संपदा से समृद्ध राज्य है और खनिज से मिलने वाला राजस्व राज्य के विकास तथा जनकल्याणकारी योजनाओं में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में खनिज संसाधनों से जुड़े अधिकारों और राजस्व पर किसी भी तरह के असर को पार्टी बर्दाश्त नहीं करेगी।

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पाकुड़ प्रखंड में सांसद ने कार्यकर्ताओं को दिया गांव-गांव पहुंचने का निर्देश

पाकुड़ प्रखंड की बैठक धनुष पूजा स्थित झामुमो कार्यालय में प्रखंड अध्यक्ष मुस्लेउद्दीन शेख की अध्यक्षता में हुई। इसमें राजमहल सांसद विजय हांसदा, जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम और पूर्व जिलाध्यक्ष श्याम यादव मौजूद रहे। सांसद विजय हांसदा ने कहा कि खनिज संसाधनों से राज्य के राजस्व में कमी आती है तो इसका असर विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं पर पड़ सकता है। उन्होंने कार्यकर्ताओं से गांव-गांव जाकर लोगों को विधेयक के प्रभावों से अवगत कराने और आंदोलन के लिए जनसमर्थन जुटाने का आह्वान किया। जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम ने कहा कि झामुमो झारखंड की जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा के अधिकारों की रक्षा के लिए सड़क से सदन तक संघर्ष करेगा। बैठक में प्रखंड, पंचायत और बूथ स्तर पर जनजागरण अभियान चलाने का निर्णय लिया गया।

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हिरणपुर में जिलाध्यक्ष ने कहा- अधिकारों से समझौता नहीं

हिरणपुर में प्रखंड अध्यक्ष इसहाक अंसारी की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिलाध्यक्ष अजीजुल इस्लाम, जिला संगठन सचिव मुसलोद्दीन अंसारी और युवा जिला उपाध्यक्ष दीपू मुर्मू बतौर पर्यवेक्षक मौजूद रहे। जिलाध्यक्ष ने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा पर पहला अधिकार यहां की जनता का है। पार्टी किसी ऐसी नीति को स्वीकार नहीं करेगी, जिससे राज्य के अधिकार और जनता के हित प्रभावित हों।
उन्होंने कार्यकर्ताओं से विधेयक के संभावित प्रभावों की जानकारी ग्रामीणों तक पहुंचाने और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन को मजबूत करने की अपील की। बैठक में कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर संघर्ष करने का संकल्प लिया।

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अमड़ापाड़ा में कहा- विधेयक वापस होने तक जारी रहेगा आंदोलन

अमड़ापाड़ा प्रखंड के पहाड़पुर स्थित झामुमो कार्यालय में प्रखंड अध्यक्ष श्यामलाल हांसदा की अध्यक्षता में बैठक हुई। जिला उपाध्यक्ष हाजी समद अली, जिला सह सचिव तरुण मंडल, युवा मोर्चा जिलाध्यक्ष सुनील टुडू, युवा जिला सचिव अमित भगत, जिला सदस्य मंटू भगत और कोर्नेलियुस हेम्ब्रम मौजूद रहे।
हाजी समद अली ने कहा कि विधेयक झारखंड जैसे खनिज संपन्न राज्य के हित में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे राज्य के राजस्व और विकास योजनाओं पर असर पड़ सकता है। कार्यकर्ताओं से उन्होंने दूर-दराज के गांवों तक विधेयक की जानकारी पहुंचाने और आंदोलन की तैयारी तेज करने को कहा। बैठक में प्रचार-प्रसार के लिए प्रखंड स्तर पर पर्यवेक्षक नियुक्त करने का भी निर्णय लिया गया।

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महेशपुर में पंचायत स्तर तक जिम्मेदारी बांटी

महेशपुर प्रखंड कार्यालय में अध्यक्ष अब्दुल वदूद की अध्यक्षता में हुई बैठक में जिला संगठन सचिव अनारूद्दीन मियां, सांसद प्रतिनिधि कुणाल अल्फ्रेड हेंब्रम और छात्र मोर्चा जिला सचिव तौसीफ इकबाल मौजूद रहे। बैठक में पंचायतों से पहुंचे कार्यकर्ताओं को आंदोलन की तैयारी और लोगों को विधेयक की जानकारी देने की जिम्मेदारी सौंपी गई। अब्दुल वदूद ने कहा कि झारखंड को खनिज संपदा से मिलने वाला राजस्व विकास योजनाओं के लिए महत्वपूर्ण है। इसलिए कार्यकर्ता गांव-गांव जाकर लोगों को विधेयक के संभावित प्रभावों की जानकारी दें। जिला संगठन सचिव अनारूद्दीन मियां समेत अन्य नेताओं ने कहा कि जब तक ग्रामीण स्तर तक मुद्दे की जानकारी नहीं पहुंचेगी, तब तक आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन नहीं मिल सकेगा।

चारों प्रखंडों की बैठकों से साफ संकेत

झामुमो की चारों प्रखंड बैठकों में एक बात समान रही—विधेयक के विरोध को केवल पार्टी स्तर तक सीमित नहीं रखने, बल्कि इसे पंचायत और गांवों तक ले जाने की रणनीति तैयार की गई। कार्यकर्ताओं को जनसंपर्क, जागरूकता और आंदोलन की तैयारी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी नेताओं ने कहा कि झारखंड के अधिकारों और हितों की रक्षा के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।

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