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September 16, 2026 8:46 pm

विद्यालयों की जमीनी हकीकत दिखाने पर विभागीय रोक?

बाहरी लोगों के प्रवेश से लेकर आंकड़े-फोटोग्राफ देने तक पर पाबंदी; उल्लंघन पर प्रधानाध्यापकों पर कार्रवाई की चेतावनी, पत्रकारों ने उठाए पारदर्शिता पर सवाल

पाकुड़। सरकारी और गैर-सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था को लेकर अब सवाल सिर्फ सुविधाओं और पढ़ाई तक सीमित नहीं हैं, बल्कि विद्यालयों की जमीनी स्थिति सामने लाने की प्रक्रिया भी चर्चा में आ गई है। झारखंड शिक्षा परियोजना, पाकुड़ की ओर से 15 सितंबर को जारी कार्यालय आदेश में कक्षा 1 से 12 तक संचालित सभी सरकारी एवं गैर-सरकारी विद्यालयों के प्रधानाध्यापक व प्रभारी प्रधानाध्यापकों को बाहरी व्यक्तियों के अनधिकृत प्रवेश पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय का अनुश्रवण या निरीक्षण करने वाले पदाधिकारियों के अलावा किसी अन्य व्यक्ति को अधोहस्ताक्षरी की अनुमति के बिना विद्यालय से संबंधित आंकड़ा, ब्यौरा या फोटोग्राफ उपलब्ध नहीं कराया जाए। आदेश का उल्लंघन होने पर संबंधित प्रधानाध्यापक को सीधे जिम्मेदार मानते हुए सुसंगत नियमों के तहत कठोर अनुशासनिक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।

अब सवाल—विद्यालय की समस्या सामने कैसे आएगी?

आदेश सामने आने के बाद पत्रकारों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और अभिभावकों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि यदि किसी विद्यालय में शिक्षकों की अनुपस्थिति, बच्चों की पढ़ाई, मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता, जर्जर भवन, पेयजल, शौचालय, बिजली, साफ-सफाई या सुरक्षा से जुड़ी समस्या है, तो उसकी जमीनी स्थिति की स्वतंत्र रूप से जानकारी जुटाने और उसे सार्वजनिक करने की प्रक्रिया क्या होगी? ग्रामीण क्षेत्रों में विद्यालय स्थानीय समाज से सीधे जुड़े होते हैं। ऐसे में अभिभावक या ग्रामीण किसी समस्या की जानकारी देते हैं तो उसकी वास्तविक स्थिति तक पहुंचना और संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकृष्ट करना निगरानी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है।

नशीले पदार्थों की शिकायत का मामला भी उठा

झारखंड जर्नलिस्ट एसोसिएशन के जिला उपाध्यक्ष प्रीतम सिंह यादव ने आदेश को लेकर आपत्ति जताई है। उन्होंने कहा कि पत्रकारिता का उद्देश्य किसी विद्यालय या विभाग को बदनाम करना नहीं, बल्कि जनहित से जुड़े मामलों को सामने लाना है। उन्होंने दावा किया कि करीब दो महीने पहले विद्यालयों के आसपास नशीले पदार्थों की बिक्री से संबंधित एक खबर तैयार कर जिला शिक्षा पदाधिकारी को भी भेजी गई थी, लेकिन उनके अनुसार अब तक कोई सकारात्मक पहल सामने नहीं आई।।यादव ने कहा कि यदि किसी विद्यालय में कोई गंभीर समस्या या अनियमितता है तो उसकी जानकारी सामने आना और संबंधित अधिकारियों तक पहुंचना जरूरी है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर पत्रकारों की बैठक कर आगे की रणनीति तय की जाएगी तथा जिला उपायुक्त और राज्य स्तर के संबंधित अधिकारियों के समक्ष भी मामला रखा जाएगा।

अनधिकृत प्रवेश रोकना अलग, जनहित की निगरानी अलग

विभागीय आदेश का एक उद्देश्य विद्यालय परिसरों में अनधिकृत प्रवेश और बिना अनुमति आधिकारिक जानकारी या तस्वीरें साझा करने पर नियंत्रण रखना है। लेकिन आदेश के व्यापक प्रभाव को लेकर अब यह सवाल सामने है कि अनुशासन और सुरक्षा के साथ पारदर्शिता तथा जनहित की निगरानी का संतुलन कैसे बनेगा। फिलहाल 15 सितंबर के इस आदेश ने पाकुड़ में विद्यालयों की निगरानी, सूचना की उपलब्धता और पत्रकारिता के अधिकार को लेकर बहस छेड़ दी है। अब नजर इस बात पर है कि शिक्षा विभाग इस आदेश के दायरे और जनहित से जुड़े मामलों में सूचना उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को लेकर आगे क्या स्पष्टता देता है।

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