डालसा ने गांव-गांव चलाया जागरूकता अभियान, भरण-पोषण से लेकर कानूनी अधिकारों तक की दी जानकारी
पाकुड़। बुजुर्ग माता-पिता की देखभाल से मुंह मोड़ना अब भारी पड़ सकता है। माता-पिता एवं वरिष्ठ नागरिक भरण-पोषण तथा कल्याण अधिनियम, 2007 के तहत ऐसे मामलों में तीन महीने तक की जेल या पांच हजार रुपए तक जुर्माना अथवा दोनों का प्रावधान है। इसी कानून के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए रविवार को जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) की ओर से जिले के सभी प्रखंडों में विशेष जागरूकता अभियान चलाया गया। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह डालसा अध्यक्ष दिवाकर पांडेय के निर्देश और डालसा सचिव रूपा बंदना किरो के मार्गदर्शन में पैरा लीगल वॉलंटियर्स ने गांव-गांव और घर-घर पहुंचकर वरिष्ठ नागरिकों तथा उनके परिजनों को कानूनी अधिकारों की जानकारी दी।
अभियान के दौरान बताया गया कि माता-पिता अपने वयस्क बेटे-बेटियों और कानूनी वारिसों से भरण-पोषण की मांग कर सकते हैं। इसमें भोजन, कपड़े, आवास, चिकित्सा सुविधा और देखभाल शामिल है। वहीं, यदि किसी बुजुर्ग ने देखभाल की शर्त पर अपनी संपत्ति बच्चों या रिश्तेदारों को हस्तांतरित की है और वे बाद में देखभाल से मुकर जाते हैं, तो अधिनियम की धारा 23 के तहत संपत्ति हस्तांतरण रद्द कराने का अधिकार भी है।
वॉलंटियर्स ने बताया कि इसके लिए भरण-पोषण ट्रिब्यूनल में आवेदन किया जा सकता है। प्रक्रिया सरल है और इसके लिए भारी-भरकम फीस या वकील की अनिवार्यता नहीं है। नोटिस तामील होने के 90 दिनों के भीतर मामले के निपटारे का प्रावधान है। इसके साथ ही राष्ट्रीय वरिष्ठ नागरिक हेल्पलाइन 14567 और डालसा के माध्यम से मिलने वाली निःशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी भी दी गई। शहरकोल, बासमती, हीरानंदपुर, बाबूपुर, सोनाजोड़ी, डांगापाड़ा, डोमनगड़िया, लिट्टीपाड़ा, महेशपुर, पाकुड़िया, हिरणपुर और अमड़ापाड़ा सहित कई ग्रामीण एवं आदिवासी बहुल क्षेत्रों में अभियान चलाया गया। इसमें पैरा लीगल वॉलंटियर्स नसीम अंसारी, मनोज सोरेन, याकूब अली, कमला राय गांगुली, लक्ष्मी कुमारी सहित अन्य सदस्यों ने सक्रिय भूमिका निभाई।








