सानू कुमार
महेशपुर। शरद ऋतु के आगमन के साथ ही महेशपुर प्रखंड क्षेत्र में प्रकृति ने अपना मनमोहक रूप दिखाना शुरू कर दिया है। आसमान में तैरते सफेद बादलों और धरती पर लहलहाते काश के फूलों ने वातावरण में शारदीय नवरात्र और दुर्गापूजा के आगमन का एहसास करा दिया है। प्रखंड क्षेत्र से होकर गुजरने वाली बांसलोई नदी का तट इन दिनों काश के फूलों से खासा आकर्षक नजर आ रहा है। नदी के कई हिस्सों में पानी कम होने और कुछ स्थानों पर धारा सूखने के कारण बीच नदी में उगे काश के फूल सफेद चादर की तरह दिखाई दे रहे हैं। मंद-मंद हवा के साथ लहराते काश के फूल राहगीरों और स्थानीय लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रहे हैं।
प्रकृति का यह मनोहारी दृश्य ऐसा प्रतीत होता है, मानो शारदीय नवरात्र और दुर्गापूजा के स्वागत के लिए धरती ने खुद को सफेद फूलों से सजा लिया हो। सुबह और शाम के समय नीले आसमान, सफेद बादलों और काश के फूलों का संगम क्षेत्र की खूबसूरती में चार चांद लगा रहा है। वर्षा ऋतु के समाप्त होने और शरद ऋतु के आगमन के साथ ही खेतों की मेड़ों, नदी किनारे तथा बलुई और नम भूमि वाले क्षेत्रों में काश के फूल खिलने लगते हैं। बांसलोई नदी के तट पर भी इस वर्ष कई स्थानों पर बड़ी संख्या में काश के फूल खिले हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि काश के फूलों का खिलना शरद ऋतु और दुर्गापूजा के आगमन का प्राकृतिक संकेत माना जाता है।
औषधीय उपयोग भी बताया जाता है
काश एक प्रकार की घास है, जिसका आयुर्वेद में भी औषधीय महत्व बताया गया है। ग्रामीण क्षेत्रों में इसके फूल और पत्तों का उपयोग कुछ पारंपरिक एवं शुभ कार्यों में भी किया जाता है। फिलहाल बांसलोई नदी के किनारे खिले काश के फूल प्रकृति प्रेमियों और स्थानीय लोगों के लिए आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। शरद ऋतु की यह प्राकृतिक छटा क्षेत्र में उत्सव के माहौल को और खुशनुमा बना रही है।





