बड़ा सवाल:
क्या चैनपुर अंचल कार्यालय में लगे इन गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच होगी?
या फिर विधानसभा में उठी आवाजें सिर्फ कागजों तक ही सीमित रह जाएंगी?
पलामू: चैनपुर अंचल कार्यालय को लेकर इन दिनों स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश देखने को मिल रहा है। आम नागरिकों का आरोप है कि यहां काम में देरी ही नहीं, बल्कि गलत तरीके से कार्य करने की प्रवृत्ति भी तेजी से बढ़ी है। जमीन से जुड़े मामलों में अनियमितता, दलालों की सक्रियता और अधिकारियों की कार्यशैली पर लगातार सवाल उठ रहे हैं।
बताया जा रहा है कि एक सामाजिक चर्चा के दौरान व्हाट्सएप के माध्यम से लोगों की राय ली गई, जिसमें कई चौंकाने वाली टिप्पणियां सामने आईं। कुछ लोगों का कहना है कि संविधान द्वारा दिए गए अधिकारों का लाभ तो मिल रहा है, लेकिन कहीं-कहीं कानूनों के दुरुपयोग की आशंका भी जताई जा रही है। लोगों में यह डर भी देखने को मिला कि शिकायत करने पर उल्टा कानूनी कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।
स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि अंचल कार्यालय में बिना पैसे के काम होना मुश्किल है। “लाखों रुपये खर्च कर पद पर आए लोग एक साल में ही पैसा निकालने की कोशिश करते हैं,”—ऐसी टिप्पणियां भी सामने आई हैं। वहीं, कई लोगों ने कार्यालय को “जमीन दलालों का अड्डा” तक बता दिया, जहां सिर्फ प्रभावशाली लोगों के काम प्राथमिकता से होते हैं।
जमीन हेराफेरी के भी गंभीर आरोप लगे हैं। कुछ मामलों में 22 डिसमिल से लेकर 29 एकड़ तक की जमीन से संबंधित विवाद सामने आए हैं, जिनमें गड़बड़ी की आशंका जताई जा रही है। कई मामले न्यायालय, यहां तक कि उच्च न्यायालय तक पहुंच चुके हैं।
इस मुद्दे को लेकर क्षेत्र के विधायक आलोक चौरसिया द्वारा विधानसभा में आवाज उठाने की बात भी सामने आई है। हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि अब तक जमीनी स्तर पर कोई ठोस जांच या कार्रवाई नहीं हुई है, जिससे लोगों में निराशा बढ़ रही है।
वहीं, कुछ नागरिकों ने यह भी कहा कि आम आदमी अब खुलकर बोलने से डरता है। लगातार चक्कर लगाने के बावजूद काम नहीं होने से लोगों की “चप्पल घिस चुकी है”, लेकिन समाधान अब तक नहीं मिला।










