मेदिनीनगर : नगर निगम क्षेत्र के बाजारों की स्थिति इन दिनों चर्चा का विषय बनी हुई है। बाजार क्षेत्र में अंधेरा, उड़ती धूल और सफाई व्यवस्था को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। टेंडर प्रक्रिया पूरी होने और शुल्क तय होने के बावजूद मूलभूत समस्याएं अब भी जस की तस बनी हुई हैं।
जहां सब्जियों की दुकानें लगती हैं, वहां कई बिजली के पोल बिना लाइट के खड़े दिखाई देते हैं। पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नदारद हैं। रात होते ही कई हिस्सों में अंधेरा छा जाता है, जिससे राहगीरों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे के कारण कुत्तों के झुंड भी राह चलने वालों के पीछे पड़ जाते हैं, जिससे डर का माहौल बना रहता है।
वहीं सफाई व्यवस्था भी सवालों के घेरे में है। रात 8:30 बजे या कभी 9 बजे के आसपास सफाई करने पहुंचने की बात सामने आती है। झाड़ू लगने के दौरान धूल इतनी उड़ती है कि आसपास मौजूद लोगों की आंखों और नाक तक में जाकर परेशानी पैदा करती है। कई बार यह महसूस होता है मानो सफाई के बजाय लोगों की मुश्किलें और बढ़ रही हों।
इसी दौरान जब यह बातें सुनने को मिलीं तो मामले को लेकर नगर निगम मेयर अरुण शंकर से मिलने उनके आवास तक पहुंचा गया, ताकि यह बताया जा सके कि पानी का छिड़काव और स्ट्रीट लाइट की व्यवस्था कर इस समस्या का समाधान किया जा सकता है। लेकिन वहां यह कहा गया कि दोपहर में मुलाकात नहीं होती है। इसके बाद टेलिफोनिक तरीके से भी संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन लगने के बावजूद जवाब नहीं मिला।
हालांकि सबसे अधिक चर्चा इस बात को लेकर हो रही है कि चुनाव के दौरान स्थिति बिल्कुल अलग थी। उस समय यदि फोन लगाया जाता था तो अक्सर जवाब मिल जाता था या कॉल रिसीव कर लिया जाता था। लेकिन चुनाव जीतने के बाद अब प्रतिक्रिया ऐसी देखने को मिल रही है कि फोन का जवाब तक नहीं आता।
लोगों का कहना है कि जनता अपने प्रतिनिधियों को इस उम्मीद से चुनती है कि वे हर परिस्थिति में उनकी समस्याओं को सुनेंगे और समाधान का प्रयास करेंगे। लेकिन बाजार क्षेत्र की वर्तमान स्थिति और जनप्रतिनिधियों तक पहुंच की कठिनाई अब लोगों के बीच नाराजगी का कारण बनती जा रही है।










