जनवरी से सितंबर तक 52 हादसों में 48 की मौत, स्कूल बसों की होगी भौतिक जांच
पाकुड़। जिले में लगातार हो रहे सड़क हादसों को लेकर उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने सख्त रुख अपनाया है। समाहरणालय सभागार में मंगलवार को जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में उन्होंने हादसों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए विभागों को समयबद्ध और जिम्मेदारी के साथ कार्रवाई करने के निर्देश दिए। जनवरी से सितंबर 2026 तक जिले में 52 सड़क दुर्घटनाओं में 48 लोगों की मौत और 56 लोग घायल हुए हैं। अकेले सितंबर में तीन हादसों में दो लोगों की मौत और चार लोग घायल हुए। उपायुक्त ने पिछले छह माह में हुए सभी सड़क हादसों वाले स्थानों का दोबारा भौतिक सत्यापन कराने का निर्देश दिया। इन स्थानों पर दुर्घटना के कारणों का विश्लेषण कर स्थायी सुरक्षा उपाय किए जाएंगे। अंधे मोड़, कम दृश्यता और रात में विजिबिलिटी की समस्या वाले स्थानों पर सोलर ब्लिंकर, स्ट्रीट लाइट, रोड सिग्नेज, कॉनकेव मिरर और रिफ्लेक्टिव टेप लगाने को कहा गया।
स्कूल बसों की होगी जांच
विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर जिले के स्कूलों में चलने वाली बसों और अन्य वाहनों की शत-प्रतिशत कागजी व भौतिक जांच होगी। डीटीओ को स्कूल प्रबंधन से समन्वय कर वाहनों के दस्तावेज दुरुस्त कराने और मोटरयान निरीक्षक को वाहनों की भौतिक स्थिति की जांच करने का निर्देश दिया गया है।
पूजा से पहले सड़कों की मरम्मत
दुर्गापूजा को देखते हुए खराब सड़कों की मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए। निर्माण व मरम्मत कार्य निर्धारित समय में गुणवत्तापूर्ण तरीके से पूरा करने तथा बाद में नियमित रखरखाव पर भी निगरानी रखने को कहा गया।
सड़क पर बालू-गिट्टी मिली तो कार्रवाई
डीसी ने सड़क किनारे बालू, गिट्टी, ईंट या अन्य निर्माण सामग्री रखने पर रोक लगाते हुए उल्लंघन करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई के निर्देश दिए। राष्ट्रीय और राज्य मार्गों पर रंबल स्ट्रिप, चेतावनी बोर्ड, ब्लिंकर लाइट, स्ट्रीट लाइट और रिफ्लेक्टिव टेप जैसे सुरक्षा संसाधन सुनिश्चित करने को कहा गया।
हेलमेट से नशे में ड्राइविंग तक निगरानी
बैठक में वाहन जांच अभियान की भी समीक्षा हुई। बिना हेलमेट, सीट बेल्ट नहीं लगाने, नाबालिगों के वाहन चलाने और शराब के नशे में ड्राइविंग समेत अन्य यातायात नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई जारी रखने और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए गए।
उपायुक्त ने कहा कि सड़क हादसों पर रोक केवल चालान और दंड से संभव नहीं है। इसके लिए बेहतर सड़क व्यवस्था, प्रभावी निगरानी, जन-जागरूकता और विभागों के बीच समन्वय जरूरी है। उन्होंने स्कूल, कॉलेज, पंचायत और सार्वजनिक स्थलों पर सड़क सुरक्षा जागरूकता अभियान व्यापक स्तर पर चलाने तथा बैठक के निर्णयों का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।






