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August 9, 2026 9:20 pm

विश्व आदिवासी दिवस पर संस्कृति संरक्षण, जल जमीन और जंगल बचाने का ले संकल्प” : गेब्रियल मुर्मू।

राजकुमार भगत

पाकुड़। विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर जिले में उत्साह, गौरव और सांस्कृतिक चेतना के साथ विविध संस्थाओं द्वारा विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। प्रभात फेरी निकल गया।पारंपरिक वेशभूषा, लोकनृत्य, लोकगीत और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के बीच आदिवासी समाज की गौरवशाली विरासत को नमन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने जल, जंगल, जमीन, भाषा, संस्कृति और सामाजिक अधिकारों की रक्षा का संकल्प दोहराते हुए युवाओं से अपनी पहचान और परंपराओं पर गर्व करने का आह्वान किया।
इस अवसर पर शिक्षाविद संत पॉल स्कूल कोलाजोड़ा के निदेशक सह झारखंड प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के जिला अध्यक्ष गेब्रियल मुर्मू ने कहा कि आदिवासी समाज केवल प्रकृति का संरक्षक ही नहीं, बल्कि मानवता को प्रकृति के साथ संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा देने वाला समाज है। आज आवश्यकता है कि विकास की मुख्यधारा में आदिवासी समाज की संस्कृति, परंपराओं और अधिकारों को समान सम्मान और स्थान मिले।आदिवासी संस्कृति हमारी राष्ट्रीय विरासत है, जिसका संरक्षण हम सभी का साझा दायित्व है। गेब्रियल मुर्मू शिक्षाविद ने अपने संबोधन में कहा, “आदिवासी भाषाएं, लोककला और पारंपरिक ज्ञान हमारी अमूल्य धरोहर हैं। यदि इन्हें नई पीढ़ी तक नहीं पहुंचाया गया, तो यह हमारी सांस्कृतिक क्षति होगी।, “आज का युवा अपनी पहचान पर गर्व करे, नशामुक्त समाज के निर्माण में भागीदारी निभाए और शिक्षा, कौशल तथा नेतृत्व के माध्यम से समाज को नई दिशा दे। “आदिवासी समाज ने सदियों से परिवार, संस्कृति और सामाजिक मूल्यों को संजोकर रखा है। महिलाओं का सम्मान, शिक्षा और आर्थिक सशक्तिकरण ही समाज की वास्तविक प्रगति का आधार है। आज के दिन हमें “जल, जंगल, जमीन की रक्षा, आदिवासी संस्कृति एवं भाषाओं के संरक्षण, सामाजिक समरसता, पर्यावरण संरक्षण तथा भावी पीढ़ी को अपनी सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का संकल्प लेना चाहिए।

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