गिरिडीह जिले के पीरटांड़ स्थित ऐतिहासिक माराङ बुरू दिशोम मांझी थान में बुधवार को लिट्टीपाड़ा विधायक हेमलाल मुर्मू ने पारंपरिक संथाली रीति-रिवाज के साथ पूजा-अर्चना की। इस दौरान स्थानीय ग्रामीण, मांझी थान के अनुयायी और आदिवासी समाज के लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे। पूजा के दौरान विधायक ने झारखंड की उन्नति, विकास और राज्यवासियों की सुख-शांति की कामना करते हुए झारखंड मुक्ति मोर्चा सरकार के दीर्घकालीन जनहितकारी कार्यों की प्रार्थना की। पीरटांड़ का माराङ बुरू दिशोम मांझी थान संथाल आदिवासी समाज की आस्था, परंपरा और सांस्कृतिक विरासत का प्रमुख केंद्र माना जाता है। “माराङ बुरू” को संथाल समुदाय प्रकृति और सृष्टि के रक्षक देवता के रूप में पूजता है। वर्षों से यह स्थल बाहा, सोहराय और करम जैसे पारंपरिक पर्वों के आयोजन, सामुदायिक बैठकों और प्रकृति पूजा का केंद्र रहा है, जहां आदिवासी समाज अपनी लोक संस्कृति, नृत्य-संगीत और परंपराओं को जीवंत रखता है। विधायक हेमलाल मुर्मू ने कहा कि माराङ बुरू मांझी थान केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि झारखंड की आदिवासी पहचान, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक गौरव का प्रतीक है। उन्होंने राज्य सरकार के पर्यटन, कला-संस्कृति, खेलकूद एवं युवाकार्य विभाग तथा जिला प्रशासन गिरिडीह द्वारा किए जा रहे विकास कार्यों की सराहना करते हुए कहा कि इस स्थल को सांस्कृतिक एवं पर्यटन केंद्र के रूप में नई पहचान मिल रही है।







