अमर भगत
अमड़ापाड़ा। हुल दिवस के अवसर पर दुमका से भोगनाडीह तक निकाली गई पदयात्रा का अमड़ापाड़ा पहुंचने पर स्थानीय लोगों एवं सामाजिक कार्यकर्ताओं ने पारंपरिक हुल जोहार के साथ गर्मजोशी से स्वागत किया। पदयात्रियों का फूल-माला पहनाकर और आदिवासी परंपरा के अनुसार सम्मान किया गया।
स्वागत कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीण, युवा और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस दौरान हुल क्रांति के महानायक सिदो मुर्मू और कान्हू मुर्मू समेत हुल आंदोलन के वीर शहीदों को श्रद्धापूर्वक याद किया गया। वक्ताओं ने कहा कि हुल दिवस आदिवासी समाज के संघर्ष, वीरता और स्वाभिमान का प्रतीक है। यह दिन जल, जंगल और जमीन की रक्षा के लिए हुए ऐतिहासिक आंदोलन से प्रेरणा लेने का अवसर देता है। पदयात्रा के माध्यम से हुल आंदोलन के इतिहास और उसके संदेश को लोगों तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है।
स्वागत के बाद पदयात्रियों का जत्था अमड़ापाड़ा में रात्रि विश्राम कर भोगनाडीह के लिए रवाना हुआ, जहां 30 जून को आयोजित हुल दिवस कार्यक्रम में शामिल होगा। मौके पर बेंजामिन मरांडी, स्टेफन मरांडी, रामदास टुडू, पुराण मुर्मू, नजीर सोरेन, बेटाटन हांसदा, ब्रेनथूस मरांडी, लॉरेंस बेसरा, मानु हेम्ब्रम, सोइलेन मुर्मू सहित अन्य लोग मौजूद रहे।








