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May 16, 2026 4:08 am

त्रिकोणीय संघर्ष में दो महारथियों का क्षेत्र में न होना भाजपा की कुंडली को कर रही बेहतर

एक अकेला सब पर भारी, वह है झारखंड की उभरती वीर बहादुर नारी, कल्पना

लोबिन हेब्रम का आदिवासियों में मजबूत पकड़, नजर अंदाज करना होगा बड़ी भूल

राजकुमार भगत

पाकुड़। राजमहल लोकसभा क्षेत्र के अंतिम चरण में 1 जून को चुनाव के लिए तैयार है। राजमहल लोकसभा क्षेत्र में पाकुड़ जिला के पाकुड़ लिट्टीपाड़ा एवं महेशपुर तीन विधानसभा क्षेत्र एवं साहिबगंज के राजमहल बोरियों एवं बरहेट तीन विधानसभा क्षेत्र हैं। दोनों जिला मिलकर कुल छह विधानसभा क्षेत्र आते हैं। पाकुड़ जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्र में इंडिया गठबंधन का कब्जा है। इनमें से लिट्टीपाड़ा एवं महेशपुर में झामुमो का कब्जा है जबकि पाकुड़ विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस का कब्जा है यहां से आलमगीर आलम विधायक है। जो इस समय ईडी के गिरफ्त में है। लिट्टीपड़ा और महेशपुर अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है जबकि पाकुड़ की सीट सामान्य श्रेणी के हैं। लिट्टीपाड़ा एवं महेशपुर की सीट में निर्णायक मत अनुसूचित जनजाति की होती है वहीं अगर पाकुड़ की बात करें इसका निर्णायक अल्पसंख्यक वोटरों पर निर्भर करता है। इसी प्रकार से साहिबगंज जिले के दो विधानसभा क्षेत्र बरहेट एवं बोरियो में झामूमो का कब्जा है राजमहल भाजपा के कब्जे में है। बरहेट के विधायक राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन है इस क्षेत्र में उनकी अच्छी पकड़ है। किंतु वे चुनाव प्रचार में भाग नहीं ले रहे हैं। वे इस समय ईडी के कब्जे में हैं। पाकुड़ एवं बरहेट के दोनो विधायक ईडी कस्टडी में होने भाजपा का राह आसान हो गया है। बरहेट एवं बोरिया अनुसूचित जनजाति के लिए सुरक्षित है। राजमहल लोक सभा क्षेत्र में लगभग 36 % आदिवासी 33 % मुस्लिम
वोटर हैं। आदिवासी वोट अधिकांशत तीर धनुष पर जाता है । वर्ष 2019 में जब विधानसभा का चुनाव हुआ था तो भाजपा को छह विधानसभा क्षेत्र में 407626 वोट एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा को506589 मत मिले थे। अगर एक-एक विधानसभा क्षेत्र की देखा जाए तो राजमहल में भाजपा को 103062 एवं झामुमो को 80262
पाकुड़ में भाजपा को 76711 एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा को 125966 मत मिले। महेशपुर में भाजपा को 58212 एवं झामुमो को 89635 मत मिले।लिट्टीपाड़ा में भाजपा को 550 35 एवं जेएमएम को 71504 , इसी तरह से बोरियों में भाजपा को 65307 एवं झामुमो को 76301, यदि बात करें पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की तो उन्हें बरहेट विधानसभा क्षेत्र से 62921 वोट मिले जबकि भाजपा को 49299 मत मिले थे। यह तो रही विधानसभा क्षेत्र की बात और इस वर्ष सबसे बड़ी बात यह है पाकुड़ से आलमगीर आलम एवं बरहेट विधानसभा क्षेत्र से हेमंत सोरेन दोनों ही ईडी के कब्जे में है । दो दिग्गज नेता के चुनाव क्षेत्र की बाहर रहने से भाजपा के लिए कुंडली का योग अच्छा हो गया है और बृहस्पति भी अच्छा है क्योंकि लोबिन हेंब्रम का आदिवासी क्षेत्र में अच्छी पकड़ है । ऐसे में भाजपा का योग और संजोग अच्छा बन रहा है। हालांकि पूर्व मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन एड़ी चोटी की जोर लगाई हुई है। उनका लगातार धुआं धार प्रत्येक दिन राजमहल लोकसभा क्षेत्र में विजय हांसदा के पक्ष में आम जनता से वोट देने की अपील कर रही है। वे एकेले बीजेपी के नेताओं पर भारी पड़ रही है। उन्होंने सीधा-सीधा कह दिया है जल जंगल और जमीन की लड़ाई में आप हमारा साथ दें। हेमंत सोरेन की ताला की चाबी आप हैं और ताला खोलने की शक्ति आप में है ।अपना धैर्य को प्रयोग करें शक्ति का प्रयोग करें और ताला को खोलें। ताकि हेमंत सोरेन बाहर आकर हम झारखंड वासियों की सेवा कर सके। मालूम हो कि अब चुनाव में मुख्य मुकाबला भाजपा गठबंधन झारखंड मुक्ति मोर्चा गठबंधन एवं निर्दलीय विधायक लोबिन हेंब्रम के बीच होगी ।क्योंकि उन्होंने अपनी पूरी शक्ति इस चुनाव के लिए झोंक दी ही। अब बाजी वही मारेगा जो हाथ हिलाने और बात बनाने की जगह हाथ मिलाएगा। थोड़ी सी मेहनत करने की जरूरत है। क्योंकि वोट को दिलचस्प बनाने में अन्य निर्दलीय उम्मीदवार एवं पार्टी भी पूरी दिलचस्पी के साथ मैदान में है। अब तो 1 जून को देखना है कि जोर किसके कितने बाजुए कातिल में है।

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