इकबाल हुसैन
महेशपुर (पाकुड़)। झालसा रांची के निर्देशानुसार जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ के तत्वावधान में महेशपुर प्रखंड सभागार में 90 दिवसीय गहन विधिक जागरूकता एवं जनसंपर्क अभियान के तहत कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लोगों को कानून, अधिकारों और सरकार द्वारा उपलब्ध कराई जा रही निशुल्क कानूनी सहायता की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्घाटन जिला विधिक सेवा प्राधिकार पाकुड़ की सचिव रूपा बंदना किरो, लीगल एड डिफेंस कॉन्सिल के चीफ सुबोध कुमार दफादार, बीडीओ डॉ. सिद्धार्थ शंकर यादव, सीओ संजय कुमार सिन्हा, एलएडीसीएस के सहायक गंगाराम टुडू और सीडीपीओ ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया। इस मौके पर डालसा सचिव रूपा बंदना किरो ने कहा कि 90 दिवसीय अभियान का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को कानूनी रूप से जागरूक और सशक्त बनाना है। उन्होंने बताया कि जिला विधिक सेवा प्राधिकार द्वारा जरूरतमंद लोगों को निशुल्क कानूनी सहायता उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने कहा कि किसी भी कानूनी समस्या के समाधान के लिए लोग लोक अदालत, जिला विधिक सेवा प्राधिकार या पारा लीगल वॉलिंटियर्स से संपर्क कर सकते हैं। साथ ही नालसा के टोल फ्री नंबर 15100 पर भी सहायता ली जा सकती है। कार्यक्रम में एलएडीसीएस चीफ सुबोध कुमार दफादार ने दहेज प्रथा, बाल विवाह और इससे जुड़े कानूनी प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सामाजिक कुरीतियों को खत्म करने के लिए लोगों का जागरूक होना जरूरी है।
बीडीओ डॉ. सिद्धार्थ शंकर यादव ने लोगों से कानून की जानकारी रखने और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ उठाने की अपील की। उन्होंने डायन प्रथा, बाल विवाह, बाल श्रम, दहेज प्रथा और घरेलू हिंसा जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ आवाज उठाने और आसपास के लोगों को जागरूक करने का आह्वान किया। सीडीपीओ ने महिलाओं और बच्चों से जुड़ी विभिन्न योजनाओं की जानकारी दी, जबकि एलएडीसीएस सहायक गंगाराम टुडू ने लोगों को उनके अधिकारों, बाल विवाह निषेध अधिनियम और नालसा की योजनाओं के बारे में बताया। कार्यक्रम के दौरान डालसा सचिव ने बाल विवाह के खिलाफ सभी को शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि बाल विवाह एक सामाजिक बुराई है, जो बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य और विकास में बाधा बनता है। सभी लोगों ने बाल विवाह मुक्त समाज बनाने का संकल्प लिया। मौके पर प्रखंड कर्मी, आंगनबाड़ी सेविका, सहिया, चौकीदार, एनजीओ प्रतिनिधि, पारा लीगल वॉलिंटियर्स समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे।








