NFHS-5 में 43.4% और NFHS-6 में 45.9% बाल विवाह का आंकड़ा; पुलिस, बाल संरक्षण इकाई और प्रोबेशन अधिकारियों की बैठक में बनी रणनीति।
पाकुड़। जिले में बाल विवाह की रोकथाम को लेकर बुधवार को पुलिस अधीक्षक की अध्यक्षता में सभी प्रखंडों के थाना प्रभारियों, वेलफेयर प्रोबेशन ऑफिसरों और पुलिस पदाधिकारियों की बैठक हुई। बैठक में बाल विवाह की पहचान से लेकर सूचना मिलने पर समय पर कार्रवाई तक की जिम्मेदारियों पर चर्चा की गई।
बैठक में डीपीसी, PCI-UNICEF मोहम्मद अनीस अंसारी ने जिले में बाल विवाह की वर्तमान स्थिति की जानकारी साझा की। उन्होंने NFHS-5 के आंकड़ों के अनुसार जिले में बाल विवाह का आंकड़ा 43.4 प्रतिशत, जबकि NFHS-6 में यह 45.9 प्रतिशत बताया। आंकड़ों के जरिए बाल विवाह की रोकथाम के लिए पुलिस और बाल संरक्षण तंत्र के बीच बेहतर समन्वय की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
अनाथ और जरूरतमंद बच्चों के लिए स्पॉन्सरशिप योजना की जानकारी
बैठक में अनाथ एवं जरूरतमंद बच्चों के लिए निर्धारित दिशा-निर्देशों के तहत स्पॉन्सरशिप योजना की जानकारी भी दी गई। संबंधित पदाधिकारियों को पात्र बच्चों तक योजना का लाभ पहुंचाने और बाल संरक्षण से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने की जानकारी दी गई।
DCPO ने सभी थाना प्रभारियों एवं Child Welfare Police Officers (CWPO) को बाल विवाह की रोकथाम, पहचान और समय पर कार्रवाई से जुड़े महत्वपूर्ण प्रावधानों से अवगत कराया।
चौकीदारों को भी बनाया जाएगा बाल संरक्षण प्रहरी
बैठक में नवनियुक्त चौकीदारों को भी बाल विवाह और बाल संरक्षण के प्रति जागरूक करने पर जोर दिया गया। बताया गया कि चौकीदार अपने-अपने क्षेत्र में बाल विवाह जैसी घटनाओं की शुरुआती सूचना उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसके लिए उन्हें संबंधित हेल्पलाइन, कानूनी प्रावधान और सूचना देने की प्रक्रिया की जानकारी देना जरूरी है। बैठक का उद्देश्य पुलिस, बाल संरक्षण इकाई और क्षेत्रीय स्तर के कर्मियों के बीच समन्वय मजबूत कर बाल विवाह की सूचना पर त्वरित कार्रवाई और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना रहा।





