जितेंद्र कुमार यादव
हिरणपुर (पाकुड़) प्रखंड के दराजमाठ गांव में गुरुवार शिव मंदिर प्राण प्रतिष्ठा बाबा मनोकामना नाथ मंदिर दराजमाठ में निकाली गई महाशिवरात्रि की बारात काफी भक्तों जनों उसमें शामिल थे बड़ा दूर-दूर से आकर प्रवेश किए थे सभी भक्तजनों झूमती और गाते बारात में शामिल हुई विश्व की सर्व श्रेष्ठ धर्म सनातन धर्म है जो पौराणिक काल चली आ रही है । दराजमाठ में आयोजित शिव पुराण कथा के नवें दिन गुरुवार रात सैकड़ों की संख्या में उपस्थित भक्तों के बीच प्रवचन देते हुए वृंदावन से आये कथा वाचक श्री पीयूष कौशिक जी महाराज ने कहीं। कथावाचक ने कहा कि सनातन धर्म के पंथ अनेक है। जो अपने अपने रूप में मानते आ रहे हैं पर मूल धर्म सनातन हैं उन्होंने कहा है की कथा में वक्त और श्रोता को जानकर होना आवश्यक है। बाल्मीकि रामायण में स्पष्ट उल्लेख है कि दोनों को ज्ञाननिधि होना जरूरी है जिसे ईश्वर ज्ञान की प्रति होती है भगवान शंकर भी कथा श्रवण करने अगर अगस्त ऋषि महाराज के पास गए थे कथा के सात संगीताये की इसमे वर्णन है। महाशिवपुराण में समाप्ति के दिन काफी संख्याओं में भक्ति जानों आय थे। श्री कौशिक महाराज विदाई के टाइम सबको झूमते और गाते हुए और गुलालों को लगाते हुए समाप्ति की इसके बाद महाशिवरात्रि का शिव विवाह 12 बजे हुई उसके बाद सभी गांव वासियों को घरों घरों में आमंत्रित करके बाबा का प्रसाद वितरण किया गया दराजमाठ समिति ।






