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June 19, 2026 2:52 pm

बंद खदान को बनाया आजीविका का जरिया, केज कल्चर से सैमुअल मुर्मू बने आत्मनिर्भर।

पाकुड़ के सोनाजोड़ी गांव के मत्स्यपालक की मिसाल, हर साल 4 लाख की आमदनी से बदली जिंदगी

पाकुड़: बंद पड़ी खदान को मछली पालन का जरिया बनाकर सोनाजोड़ी गांव के सैमुअल मुर्मू ने आत्मनिर्भरता की नई मिसाल पेश की है। राज्य सरकार की मत्स्य विस्तार एवं सुदृढ़ीकरण योजना के तहत उन्होंने केज कल्चर को अपनाया और आज हर साल करीब 5 हजार किलो मछली उत्पादन कर 4 लाख रुपए से अधिक की आमदनी कमा रहे हैं।
साल 2022-23 में सैमुअल को ₹3.58 लाख की परियोजना पर ₹3.22 लाख की सरकारी अनुदान राशि मिली। इस मदद से उन्होंने बंद पड़े खदान में आधुनिक केज प्रणाली तैयार की और मछली पालन शुरू किया। पहले जहां खेती ही आय का सीमित जरिया थी, अब वही खदान उनकी स्थायी आजीविका बन गई है। सैमुअल बताते हैं, सरकारी योजना से जुड़ने के बाद जीवन बदल गया। अब न सिर्फ परिवार की आय बढ़ी है, बल्कि मैं दूसरों को भी केज कल्चर अपनाने के लिए प्रेरित कर रहा हूँ। जिला मत्स्य पदाधिकारी काजल तिर्की ने बताया कि यह योजना ग्रामीण आजीविका को मजबूत बनाने की दिशा में एक कारगर पहल है। सैमुअल मुर्मू का प्रयास दिखाता है कि खदानों में केज कल्चर से मछली पालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा अवसर बन सकता है। यह कहानी बताती है कि नवाचार और सरकारी योजनाओं का सही उपयोग किसी भी ग्रामीण जीवन को नई दिशा दे सकता है।

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