प्रशासनिक आदेश के बाद किया गया डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था
सुदीप कुमार त्रिवेदी
सरकार भ्रष्टाचार उन्मूलन हेतु उठाए गए कदमों की लाख बानगी भर ले, लेकिन भ्रष्टाचार की गंगोत्री में डुबकी लगाने की मानसिकता रखने वाले इसके बीच से भी रास्ता ढूँढ लेते हैं । इसी तरह का एक मामला प्रकाश में आया था जहाँ पाकुड़ जिला मुख्यालय स्थित सिधो कान्हो पार्क में प्रवेश शुल्क व खुदरा अभाव के नाम पर पार्क आने वाले लोगों की जेब काटी जा रही थी । मजेदार बात यह कि उक्त पार्क पाकुड़ उपायुक्त मृत्युन्जय वर्णवाल के आवास के ठीक सामने अवस्थित है । दरअसल मसला ये था कि आप जब पार्क आते तो स्वाभाविक रूप से आप प्रवेश शुल्क देंते जिसके एवज में आपको टिकट थमाई जाती थी । इस टिकट में पार्क में प्रवेश करने का शुल्क तो 17 रूपए अंकित था लेकिन उसी के नीचे खुदरा अभाव के मद के नाम पर 3 रूपया भी अंकित था । यानि आप पार्क में प्रवेश करने के लिए 17 रूपया नहीं बल्कि 20 रूपये देने को बाध्य थे, हालाँकि उसी टिकट में खुदरा के अभाव में ली गई राशि को टिकट निर्गत करने की तिथि से 10 दिनों के अंदर वापस करने की बात भी अंकित थी परंतु टिकट में टिकट निर्गत करने की तिथि अंकित नहीं होती थी । ऐसे में कई सवाल उठते दे, मसलन ऐसा आदेश क्योंकर और किसके द्वारा दी थी ? आपके पास अगर 17 रूपये हैं तो फिर आप 20 रूपये क्यों देने को बाध्य थे ? जब टिकट में टिकट निर्गत करने की तिथि ही अंकित नही होती थी तो फिर किस तिथि से 10 दिन की गणना की जाए ? पार्क आने वाले सैलानियों की जेब में खुदरा अभाव है, इस बात का पता पहले से ही पार्क प्रबंधन को कैसे पता हो जाता था ? डिज़िटल इंडिया के इस दौर में अभी तक पार्क में डिजिटल पेमेंट की व्यवस्था क्यों नही की गई थी ? वहीं आज इस मामले का पटाक्षेप हो गया । आज नगर परिषद के कार्यपालक पदाधिकारी एवं उनकी टीम ने उक्त पार्क में पहुँच कर डिज़िटल पेमेंट दिए जाने की व्यवस्था को बहला कर दिया ।











