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August 31, 2026 11:05 pm

अंचल अधिकारी की छवि धूमिल करने को शहर में पोस्टरबाजी, प्रशासनिक महकमे में मचा हड़कंप।

कथित अवैध वसूली के आरोपों के बीच नगर थाना व अंचल कार्यालय की टीम जांच में जुटी, सीओ बोले- ईमानदारी से करता हूं काम, आरोप निराधार।

पाकुड़ अंचल कार्यालय में कथित अवैध वसूली और रिश्वतखोरी के आरोप लगाते हुए शहर के विभिन्न प्रमुख स्थानों पर पोस्टर चस्पा किए जाने का मामला सामने आया है। पोस्टर में दाखिल-खारिज, एलपीसी सहित जाति, निवास व अन्य प्रमाणपत्रों के लिए अवैध राशि लिए जाने का आरोप लगाया गया है। पोस्टरबाजी की सूचना के बाद प्रशासनिक महकमे में हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर अंचल अधिकारी और नगर थाना की टीम छानबीन में जुटी है। पुलिस व प्रशासन यह पता लगाने में जुटे हैं कि शहर के विभिन्न स्थानों पर पोस्टर किसने लगाए और इसके पीछे वास्तविक उद्देश्य क्या है। अधिकारियों को आशंका है कि कुछ असामाजिक तत्वों द्वारा सुनियोजित तरीके से अंचल अधिकारी की छवि धूमिल करने का प्रयास किया गया है।

नगर परिषद से गांधी चौक तक लगाए गए पोस्टर

बताया गया कि नगर परिषद कार्यालय परिसर, अनुमंडल पदाधिकारी कार्यालय क्षेत्र, गांधी चौक और आसपास के प्रमुख स्थानों पर पोस्टर लगाए गए। पोस्टरों में अंचल कार्यालय की कार्यप्रणाली और कथित बिचौलियों की भूमिका पर सवाल उठाए गए हैं। पोस्टर लगाने वाले संगठन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। हालांकि, पोस्टर में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन की जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है और पोस्टर किसने लगाए।

सीओ बोले- आरोप निराधार, हर व्यक्ति को मिलता है एक जैसा सम्मान।

अंचल अधिकारी ने पूरे मामले पर अपनी सफाई देते हुए कहा कि उनकी छवि को धूमिल करने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वे सरकार के कर्तव्यनिष्ठ सेवक हैं और जिला प्रशासन के निर्देशानुसार पूरी ईमानदारी के साथ अपने दायित्वों का निर्वहन करते हैं। उन्होंने कहा कि उनके कार्यालय में छोटे से लेकर बड़े अधिकारी अथवा आम नागरिक तक सभी के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार किया जाता है। अपने जरूरी कार्यों के लिए आने वाले लोगों को कभी निराश नहीं किया जाता और नियमानुसार उनके कार्यों का समय पर निष्पादन करने का प्रयास किया जाता है।
सीओ ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप गलत और निराधार हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जांच में यह सामने आता है कि किसी व्यक्ति ने जानबूझकर उनकी छवि खराब करने के उद्देश्य से पोस्टर लगाए हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ नियमानुसार मामला दर्ज कराया जाएगा, ताकि भविष्य में इस तरह की घटना की पुनरावृत्ति न हो।

जांच के बाद सामने आएगी सच्चाई

पोस्टरबाजी के बाद अब पूरे मामले की जांच पर लोगों की नजर है। प्रशासन और पुलिस के स्तर से यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि पोस्टर किसने लगाए और लगाए गए आरोपों के पीछे कोई तथ्य है या नहीं। जांच के निष्कर्ष के बाद ही मामले की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट होगी।

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