करीब 12 करोड़ की परियोजना को लेकर लिया जायजा, बेसिक स्ट्रक्चर तैयार; अब लैंडस्केपिंग और सौंदर्यीकरण पर रहेगा विशेष जोर।
पाकुड़ की करोड़ों साल पुरानी भूगर्भीय विरासत को पर्यटन के नए केंद्र के रूप में विकसित करने की कवायद तेज हो गई है। निर्माणाधीन फॉसिल पार्क की प्रगति जानने के लिए झारखंड के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) डेसेट्टी वेंकटेश्वरलू शुक्रवार को खुद पाकुड़ पहुंचे,पाकुड़ पहुंचने पर जिला वन पदाधिकारी सौरभ कुमार चंद्रा ने फूलों का गुलदस्ता भेंट कर उनका स्वागत किया। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने पार्क परिसर का निरीक्षण कर निर्माण कार्यों की स्थिति देखी और संबंधित अधिकारियों से अब तक हुई प्रगति की जानकारी ली। करीब 12 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का बुनियादी ढांचा तैयार हो चुका है। अब इसे आकर्षक स्वरूप देने के लिए लैंडस्केपिंग, सौंदर्यीकरण और बच्चों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। साहिबगंज जाने के क्रम में पाकुड़ पहुंचे वेंकटेश्वरलू ने पार्क के अलग-अलग हिस्सों का जायजा लिया। उन्होंने निर्माण के अंतिम चरण में चल रहे कार्यों, हरियाली और पर्यटकों के लिए प्रस्तावित सुविधाओं की जानकारी ली। विभाग की कोशिश है कि दिसंबर तक पार्क को तैयार कर लिया जाए। हालांकि, सभी जरूरी कार्यों को पूरा करने की अंतिम समय-सीमा मार्च रखी गई है।
सिर्फ पार्क नहीं, पाकुड़ की विरासत का बनेगा पहचान केंद्र।
निरीक्षण के दौरान अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि फॉसिल पार्क का उद्देश्य केवल लोगों को मनोरंजन की सुविधा देना नहीं है। इसके माध्यम से पाकुड़ में मिले जीवाश्मों का संरक्षण और उनके वैज्ञानिक एवं ऐतिहासिक महत्व को आम लोगों तक पहुंचाना है। राजमहल की पहाड़ियां और साहिबगंज का क्षेत्र जीवाश्मों के लिए प्रसिद्ध रहा है। प्रसिद्ध जीवाश्म वैज्ञानिक बीरबल साहनी ने भी इस क्षेत्र में महत्वपूर्ण शोध किया था। ऐसे में यह पार्क विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों के लिए ज्ञान एवं आकर्षण का केंद्र बन सकता है।
बुनियादी काम पूरा, अब खूबसूरती पर फोकस।
वेंकटेश्वरलू ने बताया कि पार्क का बेसिक स्ट्रक्चर काफी हद तक तैयार हो चुका है। अब लैंडस्केपिंग, सजावट, हरियाली और बच्चों के लिए सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। बारिश के दौरान लैंडस्केपिंग के काम में परेशानी होती है, इसलिए मौसम अनुकूल होने के बाद इस काम में तेजी आएगी। मुख्य सड़क के समीप स्थित होने के कारण पार्क के भविष्य में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के आकर्षण का केंद्र बनने की संभावना है।
सरकारी योजना से हो रहा निर्माण, रखरखाव पर मंथन।
उन्होंने स्पष्ट किया कि फॉसिल पार्क का निर्माण पीपीपी मॉडल पर नहीं, बल्कि पूरी तरह सरकारी विभागीय योजना के तहत किया जा रहा है। निर्माण पूरा होने के बाद इसके संचालन और रखरखाव की व्यवस्था तय होगी। पार्क से भविष्य में होने वाली आय का एक हिस्सा इसके रखरखाव पर खर्च करने की संभावना पर सरकार स्तर पर विचार चल रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक ने कहा कि पार्क के तैयार होने से पाकुड़ को पर्यटन के साथ शिक्षा और शोध के क्षेत्र में भी नई पहचान मिलेगी। निरीक्षण के दौरान जिला वन पदाधिकारी सौरभ कुमार चंद्रा, रेंजर बबलू देहरी समेत वन विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।







