स्वास्थ्य विभाग की समीक्षा बैठक में डीसी सख्त, कुपोषित बच्चों को एमटीसी पहुंचाने के लिए प्रखंडवार लक्ष्य तय करने का निर्देश।
पाकुड़। जिले में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने और मातृ-शिशु मृत्यु दर पर अंकुश लगाने के लिए उपायुक्त मेघा भारद्वाज ने स्वास्थ्य विभाग को कई अहम निर्देश दिए हैं। शुक्रवार को समाहरणालय सभागार में आयोजित मासिक समीक्षा बैठक में उन्होंने टीबी एवं कालाजार मरीजों को शत-प्रतिशत पोषण सहायता उपलब्ध कराने, कुपोषित बच्चों को पोषण उपचार केंद्र (एमटीसी) तक पहुंचाने और स्वास्थ्य उपकेंद्रों में प्रसव सुविधा शुरू करने पर विशेष जोर दिया। साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं में लापरवाही दूर कर निर्धारित लक्ष्यों को समय पर पूरा करने का निर्देश दिया।
बैठक में टीबी, कालाजार, मलेरिया, फाइलेरिया उन्मूलन, मातृ-शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण और स्वास्थ्य संस्थानों की गुणवत्ता समेत विभिन्न कार्यक्रमों की समीक्षा की गई।
गर्भवती महिलाओं की मृत्यु की होगी अनिवार्य समीक्षा
डीसी ने निर्देश दिया कि सरकारी या निजी अस्पताल अथवा गांव स्तर पर किसी भी गर्भवती महिला की मृत्यु होने पर मामले की अनिवार्य समीक्षा की जाए। मृत्यु के कारणों की पहचान कर सुधारात्मक कदम उठाए जाएं। परिवार नियोजन ऑपरेशन के बाद मृत्यु होने पर तत्काल रिपोर्टिंग सुनिश्चित करने को भी कहा, ताकि संबंधित लाभुक के परिजनों को नियमानुसार सहायता मिल सके।
टीबी मरीजों की पहचान और जांच में आएगी तेजी
टीबी मुक्त भारत अभियान के तहत अति जोखिम वाले गांवों में शिविर लगाकर संभावित मरीजों की बलगम और एक्स-रे जांच कराने का निर्देश दिया गया। मरीजों के संपर्क में रहने वाले लोगों की पहचान कर उन्हें टीबी से बचाव की दवा उपलब्ध कराने तथा निक्षय पोषण योजना की राशि का भुगतान शीघ्र सुनिश्चित करने को कहा गया। अधिक से अधिक निक्षय मित्र बनाने के लिए सामाजिक संगठनों, व्यवसायियों और सक्षम लोगों को अभियान से जोड़ने पर भी जोर दिया गया।
कुपोषित बच्चों के लिए तय होगा प्रखंडवार लक्ष्य
कुपोषित बच्चों को एमटीसी तक पहुंचाने में किसी तरह की कमी नहीं रहने देने का निर्देश दिया गया। इसके लिए सभी प्रखंडों की महिला पर्यवेक्षिकाओं का लक्ष्य निर्धारित किया जाएगा, ताकि बच्चों की समय पर पहचान कर उन्हें उचित उपचार और पोषण मिल सके। वहीं, गर्भवती महिलाओं को जांच, दवा और परामर्श सहित गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने को कहा गया।
स्वास्थ्य उपकेंद्रों में शुरू होगी प्रसव सुविधा
डीसी ने स्वास्थ्य उपकेंद्रों पर प्रसव सुविधा शुरू करने के लिए आवश्यक तैयारियां पूरी करने का निर्देश दिया। सामुदायिक स्वास्थ्य पदाधिकारियों (सीएचओ) को केंद्रों पर नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करते हुए इस दिशा में काम करने को कहा गया। संसाधनों की कमी और समस्याओं की पहचान कर समाधान के लिए सीएचओ एवं एमपीडब्ल्यू के साथ अलग से बैठक भी की जाएगी।
नाइट ब्लड सर्वे और टीकाकरण पर जोर
फाइलेरिया उन्मूलन के लिए नाइट ब्लड सर्वे में पंचायत प्रतिनिधियों, मुखिया, आशा कार्यकर्ताओं और आंगनबाड़ी सेविकाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने को कहा गया, ताकि कोई संभावित मरीज जांच से वंचित न रहे। यू-विन पोर्टल पर शत-प्रतिशत टीकाकरण और आंकड़ों की समय पर प्रविष्टि सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया गया।
स्वास्थ्य केंद्रों में बिजली और कोल्ड चेन की व्यवस्था
स्वास्थ्य सेवाओं को निर्बाध रखने के लिए सभी स्वास्थ्य उपकेंद्रों में सोलर और कोल्ड चेन प्वाइंट तथा सीएचसी और जिला स्तर पर जनरेटर की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया। स्वास्थ्य संस्थानों को राष्ट्रीय गुणवत्ता आश्वासन मानकों (एनक्यूएएस) के अनुरूप बनाने, स्वच्छता और संक्रमण नियंत्रण पर ध्यान देने तथा कमियों को समयबद्ध दूर करने का निर्देश दिया गया। इसके अलावा विद्यालयों में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाने, उमंग दिवस आयोजित करने और कोटपा एक्ट के तहत जांच अभियान तेज कर स्कूलों को धूम्रपान मुक्त बनाने को कहा गया। आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन के तहत ओपीडी और आईपीडी सेवाओं में वृद्धि तथा 15वें वित्त आयोग और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर मिशन की अलग से समीक्षा बैठक करने का निर्देश भी दिया गया। बैठक में उप विकास आयुक्त, सिविल सर्जन, डीएस, डीपीएम, जिला मलेरिया पदाधिकारी, सभी एमओआईसी, वीबीडी कंसल्टेंट सहित स्वास्थ्य विभाग के संबंधित पदाधिकारी एवं कर्मी उपस्थित थे।





