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November 4, 2026 11:08 pm

बैटरी चोरीकांड में गिरफ्तारी और बरामदगी के बाद भी उलझा मामला, आखिर कहां से मिलीं पांचों बैटरियां?

पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में बरामदगी स्थल का उल्लेख नहीं; वादी ने डीजे टायर शोरूम से बैटरी मिलने का किया दावा।

महेशपुर (पाकुड़)। ट्रैक्टर बैटरी चोरीकांड में दो आरोपियों की गिरफ्तारी और पांच बैटरियों की बरामदगी के बाद भी मामला उलझता नजर आ रहा है। पुलिस ने चोरीकांड का खुलासा करने का दावा किया है, लेकिन बरामदगी कहां से हुई, इस पर स्थिति स्पष्ट नहीं है। पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति में बैटरियां बरामद होने की जानकारी तो दी गई, लेकिन उस स्थान का जिक्र नहीं किया गया, जहां से उन्हें जब्त किया गया। दूसरी ओर, मामले के वादी सुजीत कुमार सिंह का दावा है कि चोरी की बैटरियां महेशपुर के डीजे टायर शोरूम एवं बैटरी डिस्ट्रीब्यूटर के गोदाम से मिली थीं। हालांकि, थाना प्रभारी इस दावे से इनकार कर रहे हैं और शोरूम संचालक दिलीप भगत ने भी किसी तरह की संलिप्तता से इनकार किया है। ऐसे में गिरफ्तारी के बाद भी बरामदगी की कहानी पर सवाल बने हुए हैं। दरअसल, एक नवंबर को सुजीत कुमार सिंह ने महेशपुर थाना में ट्रैक्टरों से बैटरी चोरी होने की लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। महेशपुर थाना कांड संख्या 182/26 के तहत प्राथमिकी दर्ज होने के बाद एसपी अनुदीप सिंह के निर्देश पर एसडीपीओ विजय कुमार के नेतृत्व में एसआईटी गठित की गई। टीम ने तकनीकी और मानवीय सूचना के आधार पर सीलमपुर गांव से राजेश रविदास और हफीजुल शेख को गिरफ्तार किया। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में दोनों ने चोरी की घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की। उनकी निशानदेही पर पांच बैटरियां बरामद की गईं।

रात करीब एक बजे गोदाम पहुंची थी पुलिस, कर्मचारी से हुई पूछताछ।

वादी पक्ष के अनुसार, दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उनसे घंटों पूछताछ की। पूछताछ में चोरी की बैटरियां बेचने से जुड़ी जानकारी मिलने पर पुलिस देर रात करीब एक बजे आरोपियों को लेकर डीजे टायर शोरूम एवं बैटरी डिस्ट्रीब्यूटर के धर्मकांटा के समीप स्थित गोदाम पहुंची। वहां तारा कुनाई नामक कर्मचारी से पूछताछ की गई। वादी का दावा है कि पूछताछ के दौरान सूरज नामक एक अन्य कर्मचारी को बैटरियां दिए जाने की बात सामने आई थी। दुकान के कर्मचारी से हुई बातचीत में भी बैटरियों की बिक्री और सूरज की भूमिका का जिक्र सामने आया है। हालांकि, इस बातचीत और घटनाक्रम की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। दूसरी तरफ पुलिस की आधिकारिक विज्ञप्ति में संबंधित गोदाम, कर्मचारियों से पूछताछ अथवा बरामदगी की जगह का कोई उल्लेख नहीं है।

बरामदगी हुई तो संबंधित लोगों की भूमिका पर चुप्पी क्यों?

इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि यदि वादी के दावे के अनुसार बैटरियां डिस्ट्रीब्यूटर के गोदाम से मिली थीं, तो वहां की जांच और कार्रवाई का पूरा ब्योरा सामने क्यों नहीं आया? क्या गोदाम में बैटरियां रखने और उनकी बिक्री से संबंधित दस्तावेजों की जांच हुई? कर्मचारियों से क्या पूछताछ की गई और बैटरियां वहां तक कैसे पहुंचीं? इन सवालों का जवाब मिलना जरूरी है। शोरूम संचालक दिलीप भगत ने मामले में अपनी संलिप्तता से इनकार किया है। उनका कहना है कि घटना के समय वह दीपावली की खरीदारी के सिलसिले में कोलकाता गए हुए थे। ऐसे में पुलिस के आधिकारिक पक्ष और वादी के दावे के बीच अंतर को दूर करना जांच के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

पीड़ित को पांच में से कितनी बैटरियां मिलीं?

मामले में बैटरियों की वापसी को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। वादी पक्ष का दावा है कि चोरी हुए सामान की पूरी वापसी नहीं हुई है। आरोप है कि दुकानदार की ओर से एक बैटरी देने की पेशकश की गई, लेकिन वादी ने इसे लेने से इनकार कर दिया। इसके बावजूद उन्हें एक बैटरी दे दी गई। वादी का कहना है कि जब उनकी दो बैटरियां चोरी हुई थीं, तो केवल एक बैटरी मिलने से नुकसान की भरपाई कैसे होगी? वहीं, पुलिस पांच बैटरियां बरामद करने का दावा कर रही है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि बरामद सभी बैटरियां किसकी हैं और पीड़ित को कितनी बैटरियां सुपुर्द की गई हैं।

कानूनी पहलू भी महत्वपूर्ण।

भारतीय न्याय संहिता की धारा 317 के तहत चोरी की संपत्ति को जानते हुए बेईमानी से प्राप्त करना या अपने पास रखना दंडनीय अपराध है। हालांकि, किसी व्यक्ति या प्रतिष्ठान के खिलाफ कार्रवाई के लिए यह जांचना जरूरी है कि उसे संपत्ति के चोरी का होने की जानकारी थी या ऐसा मानने का पर्याप्त कारण था। इसलिए बरामदगी स्थल, कर्मचारियों की भूमिका और बैटरियों की खरीद-बिक्री से जुड़े तथ्यों की जांच अहम है।
फिलहाल दो आरोपियों की गिरफ्तारी और पांच बैटरियों की बरामदगी के बावजूद कई सवालों का जवाब मिलना बाकी है। अब देखना यह है कि पुलिस बरामदगी स्थल और बैटरियों के पूरे नेटवर्क की जानकारी सार्वजनिक करती है या मामला गिरफ्तारी और बरामदगी के दावे तक ही सीमित रह जाता है।

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