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May 16, 2026 5:26 pm

सरपंच के चुनाव से आलमगीर आलम ने किया था अपनी राजनीतिक जीवन का शुरुआत

पाकुड़ में कांग्रेसियों ने कहा बेदाग साबित होंगे आलमगीर

चाहने वालों को भरोसा होंगे बेदाग साबित

राजकुमार भगत

पाकुड़: चुनावी माहौल में झारखंड के ग्रामीण विकास मंत्री सह पाकुड़ विधायक आलमगीर आलम की ईडी के द्वारा गिरफ्तारी का असर क्षेत्र में लोकसभा चुनाव पर पड़ सकता है।जानकार बताते हैं कि क्षेत्र में आलमगीर आलम का अपना एक अलग ही अस्तित्व और महत्व है। उनका व्यक्तित्व एकदम सरल और मिलनसार रहा है, उन्होंने कभी जात पात नही देखा और न ही किसी पार्टी के आए फरियादी को। जो संभव हो सका मदद जरूर किया।ईडी के बुलावा पर तुरंत पहुंच गए उन्हें पूरा भरोसा था कि वह बेदाग साबित होंगे।लेकिन किस्मत ने उनका साथ नहीं दिया और उनकी छवि धूमिल हुई है।उनको जानने वाले और मानने वाले कहते हैं कि भले ही उनके नाम से उनकी निजी सचिव या नौकर पैसा उठा रहे हो किंतु इसकी भनक मंत्री को नहीं होना लाजमी है।उनके समर्थक मायूस है और कहते हैं कि आने वाले समय में दूध का दूध और पानी का पानी होकर रहेगा साथ ही आलमगीर बेदाग ईडी के शिकंजे से बाहर निकल आएंगे। किंतु इतना तो तय है कि उनकी गिरफ्तारी से क्षेत्र में प्रचार प्रसार जो उनके माध्यम से होने थे वह अब नहीं हो पा रहा है।हालांकि इस लोकसभा चुनाव में कांग्रेस के शेष प्रतिनिधि तक आलमगीर आलम की कमी महसूस नहीं होने दे रहे हैं वे पूरी उत्साह और लगन के साथ चुनाव कार्य में लगे हैं। वहीं भाजपा का कहना है झारखंड सरकार भ्रष्टाचार की गंगोत्री है।

आलमगीर आलम की संक्षिप्त विवरण

वर्तमान में रहे ईडी के गिरफ्त में ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम साहिबगंज जिले के बरहरवा प्रखंड अंतर्गत इस्लामपुर गांव के रहने वाले हैं। कहते हैं 1978 में उन्होंने राजनीति में अपना कदम रखा और महाराजपुर से सरपंच के चुनाव में अपनी किस्मत अजमाई। वहां से सफल हुए फिर उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। फिर वह कांग्रेस पार्टी ज्वाइन कर ली। उनके व्यक्तित्व और अच्छे व्यवहार से वर्ष 1995 में वह पहली बार कांग्रेस से टिकट मिला पार्टी से चुनाव लड़े किंतु उन्हें मुंहकी खानी पड़ी। हारने के बावजूद वर्ष 2000 में फिर पार्टी ने अपनी विश्वास जताई और उन्हें विस चुनाव का टिकट दिया और उन्हें जीत हासिल हुई। वर्ष 2005 में भी उन्हें कांग्रेस पार्टी से टिकट दिया गया और वे दूसरी बार भी चुनाव जीत गए।तीसरी बार वर्ष 2009 में वे अपनी निकटतम प्रतिद्वंद्वी झामुमो के उम्मीदवार अकिल अख्तर से चुनाव हार गए। किंतु चौथी बार 2014 में पुनः कांग्रेस पार्टी से उन्हें टिकट मिला और भारी बहुमत से जीत दर्ज की व जनता में लोकप्रियता हासिल की।पुनः 2019 में भी अपनी जीत कायम रखी। वर्ष 2000 में अविभाजित बिहार में वे मंत्री पद को सुशोभित किए।20 अक्टूबर 2006 और 12 सितंबर 2009 तक के बीच झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष पद पर सुशोभित रहे। उन्हें कांग्रेस विधायक दल का नेता भी बनाया गया। किंतु अब वे ईडी द्वारा बरामद 37 करोड़ के विवाद में हैं। उन्हें रीमांड पर रखा गया है। आगे जांच पड़ताल जारी है। वे चाहें तो तत्काल वे अपनी पद से इस्तीफा दे सकते हैं किंतु यह कोई जरूरी नहीं है।उनके चाहने वाले को पूरा भरोसा है कि वे बेदाग साबित होंगे।

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