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July 27, 2026 11:46 pm

चालान की अनिवार्यता से थमी विकास कार्यों की रफ्तार, संवेदकों ने डीसी से लगाई गुहार

चालान नहीं मिलने से विकास कार्य प्रभावित, सरकारी बिलों का भुगतान अटका।

पाकुड़ जिले में जारी विभिन्न सरकारी विकास एवं निर्माण कार्यों से जुड़े संवेदकों ने सोमवार को समाहरणालय पहुंचकर उपायुक्त महोदया को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन के माध्यम से संवेदक संघ ने विकास कार्यों के लिए उपयोग किए जाने वाले लघु खनिजों के चालान जमा करने की अनिवार्यता में छूट अथवा शिथिलता प्रदान करने की गुहार लगाई है।

चालान न मिलने से ठप पड़ रहे निर्माण कार्य

उपायुक्त को दिए गए आवेदन में संवेदकों ने बताया कि वर्तमान नियमानुसार निर्माण कार्यों के बिलों के भुगतान के लिए लघु खनिजों का चालान जमा करना अनिवार्य कर दिया गया है। संवेदकों द्वारा सरकारी निर्माण कार्यों में मिट्टी, बालू, पत्थर डस्ट, ईंट आदि का व्यापक उपयोग किया जाता है। हालांकि, स्थानीय बाजार में इन सामग्री के विक्रेताओं एवं ईंट भट्टा मालिकों द्वारा चालान उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है। चालान नहीं मिलने के कारण न तो समय पर सामग्री मिल पा रही है और न ही पूर्व में किए गए कार्यों के बकाया बिलों का भुगतान हो पा रहा है।

संवेदकों के सामने गहराया आर्थिक संकट

संवेदक समूह ने दुख जताते हुए कहा कि बिलों का भुगतान रुकने से उनके सामने गंभीर आर्थिक कठिनाइयाँ उत्पन्न हो गई हैं। इतना ही नहीं, भुगतान और सामग्री के अभाव में जिले में चल रहे महत्वपूर्ण विकास कार्य भी बुरी तरह बाधित और विलंबित हो रहे हैं।

नियमों में शिथिलता की मांग

संवेदकों ने स्पष्ट किया कि वे लघु खनिजों के नियमन के महत्व को भली-भांति समझते हैं और सभी सामग्रियां स्थानीय स्तर पर ही सरकारी कार्यों हेतु खरीदी जा रही हैं। उन्होंने उपायुक्त से मानवीय आधार पर विचार करते हुए मिट्टी, डस्ट, बालू एवं ईंट जैसे लघु खनिजों के चालान की अनिवार्यता में छूट देने तथा शीघ्र आवश्यक कार्रवाई करने का अनुरोध किया, ताकि जिले के विकास कार्य सुचारू रूप से चल सकें और संवेदकों को आर्थिक संकट से राहत मिल सके।

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