पानी नहीं तो वोट नहीं’, बूंद- बूंद पानी के लिए मोहताज महेशपुर मस्जिद टोला निवासी, लोकसभा चुनाव का करेंगे बहिष्कार
पानी नहीं मिला तो करेंगे मतदान का बहिष्कार: ग्रामीण।
एस कुमार
महेशपुर प्रखंड मुख्यालय स्थित मस्जिद टोला के ग्रामीण प्यास बुझाने के लिए इधर उधर भटकने को मजबूर हैं. कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से गुहार भी लगाई, लेकिन उनकी समस्या का समाधान नहीं हो सका, जिसके बाद इन लोगों ने लोकसभा चुनाव का बहिष्कार करने का फैसला लिया है. चुनाव बहिष्कार को लेकर ग्रामीणों ने एक जुट होकर स्थानीय नेता व जनप्रतिनिधियों के खिलाफ नारे बाजे भी की. वही ग्रामीण गुलजा बीबी, मोजिदा बीबी, निरुफा बीबी, जुवेदा बीबी, नासीमा बीबी, मुमताज बीबी, कोबेरा बीबी, रेशमा बीबी, अनिया खातून, मोमोता बेवा, रुदीपा बीबी, यास्मीन बीबी, रोशनी बीबी, आशा बीबी, बासिरुन बीबी, यातिम बीबी, सद्दाम शेख, अंगूरी बीबी, कोली बेवा, तोमेपा बेवा, बुलु बेवा, असगर शेख, गुडडू रजक, रूना खातून सहित सैकड़ों ग्रामीणों ने कहा कि पिछले कई वर्षों से हम सभी ग्रामीण जल संकट सें जूझ रहे हैं. हालात यह है कि गांव में पीने का पानी नहीं होने के कारण यइधर उधर भटकते हुए दूसरे घरों में लगे बोरिंग का पानी व जार का पानी खरीदकर गुजरबसर करने को मजबूर हैं. ग्रामीणों ने अब पानी, नाला, बिजली, सड़क व आवास की समस्या को दूर नहीं करने पर मतदान बहिष्कार की चेतावनी दे दी. उनका आरोप है कि जब तक क्षेत्र में पानी की उचित व्यवस्था नहीं की जाएगी,कोई भी मतदान नहीं करेगा. मालूम हो कि इस भीषण गर्मी में गांव की महिलाएं दूसरे मोहल्ले व किसी के घर मे लगाए गए बोरिंग से मांग- मांग कर पानी लेकर जैसे-तैसे घर का काम निपटा रही हैं. साथ ही मवेशियों के लिए पानी का कोई विकल्प ही नहीं है. जिन्हें मजबूरन ग्रामीण क्षेत्र से दूर छोड़कर आ रहे हैं. वहीं कई शिकायतों के बाद स्थानीय प्रशासन और जनप्रतिनिधि चुप्पी साधे हुए हैं.
सरकारी दावों की खुली पोल
महेशपुर- मस्जिद टोला में पानी के लिए हाहाकार मचा है जबकि सरकारें कहती है कि गांव-गांव व हर एक मोहल्ले में सड़क, पानी और बिजली की व्यवस्था सुधारी है. जबकि महेशपुर प्रखंड मुख्यालय में ही सरकारी दावों की पोल खुलती नजर आ रही है.
अधिकारियों को लग रही धूप
महेशपुर- मस्जिद टोला में कुल वोटर 450 करीब है. जहां इन दिनों पूरा मोहल्ला पानी की बूंद बूंद के लिए तरस रहा है. पीने का पानी नहीं होने के कारण काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है. वही दूसरी ओर विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों को अपने दफ्तरों से बाहर निकलने मे धूप लग रही है. वही ग्रामीणों के द्वारा दो दिन पूर्व पीएचडी विभाग के जेई को उक्त समस्याओं से अवगत कराया गया था. लेकिन आज तक कोई भी अधिकारी ग्रामीणों के हाल जानने नहीं पहुंचा.











