सतनाम सिंह
पाकुड मुफस्सिल थाना क्षेत्र की बहुचर्चित कौसर मुखिया हत्याकांड मामले के आरोपी मुफस्सिल थाना अंतर्गत मनीरामपुर के शमीम अख्तर लगभग एक साल जेल में रहकर उसे जमानत पर छोड़ा गया था, कुछ दिन घर में रहने के बाद उसने फिर से अपने आप को पुलिस को सरेंडर कर दिया था। मिली जानकारी के अनुसार सरेंडर करने के बाद से अब तक पिछले 7 महीने से शमीम अख्तर पाकुड़ जेल में बंद था, सोना जोड़ी अस्पताल के डॉक्टर तथा पुलिस के अनुसार शनिवार की सुबह लगभग 3:30 बजे जेल में अचानक उसकी तबीयत बिगड़ने से उसे जेलर के द्वारा सदर अस्पताल लाया गया, जहां डॉक्टर उन्हें आनन फानन में आकर उसका इलाज शुरू कर दिया, परंतु डॉक्टर उसे बचाने में नाकाम रहे, डॉक्टर के अनुसार सुबह 4:15 बजे उसकी मौत हो गई। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उसकी मौत होने के बाद प्रशासन ने जेल पहुंचकर मामले की छानबीन की, साथ ही कई कैदियों से पूछताछ भी की गई। इधर शमीम अख्तर के परिजन उसकी मौत की खबर सुनकर सदर अस्पताल सोना जोड़ी पहुंचे। जहां उनका रो-रो कर बुरा हाल था। शमीम अख्तर उम्र करीब 36 साल अपने पीछे चार बच्चे छोड़ गए जिनमें से दो बेटा और दो बेटियां हैं। बड़े बेटे की उम्र करीब 14 साल दूसरे की 12 साल तीसरे की 10 साल और चौथ की 8 साल बताई जा रही है।
क्या था कौशर मुखिया हत्याकांड का मामला
साल 2021 में मनीका पाड़ा पंचायत के तत्कालीन मुखिया कौसर अली अपने परिवार के साथ पाकुड़ से मणिकापाड़ा अपना आवास चार पहिए वाहन के द्वारा जा रहे थे, घर जाने के क्रम में ही कुछ बदमाशों ने रास्ते मे उनके वाहन पर बमबाजी कर दिया था, इस घटना में कौसर मुखिया की बेटी की मौके पर ही मौत हो गई थी, और उनकी पत्नी बुरी तरह जख्मी हो गई थी। बदमाश यहीं पर नहीं रुके थे, बदमाशों ने जख्मी कौसर मुखिया को गाड़ी से उतार कर बुरी तरह से चाकू से गोंदकर उसकी जान ले ली थी। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में सनसनी का माहौल पैदा हो गया था, हालांकि काफी लंबे समय के बाद पुलिस को आरोपियों को पकड़ने में सफलता मिली।
परिवार के लोगों ने विलंब से सूचना देने पर जताई नाराजगी
इधर शमीम अख्तर के परिवार के लोगों ने विलंब से सूचना देने पर नाराजगी जताई है, परिवार के लोगों का कहना है कि जब शमीम अख्तर की मौत सुबह 4:15 बजे हो गई थी तो उस वक्त परिवार के लोगों को सूचना क्यों नहीं दी गई, आखिर 4 घंटे के बाद ही परिवार के लोगों को सूचना क्यों दी गई। परिवार के लोगों ने आरोप लगाते हुए कहा कि विलंब से परिवार के लोगों को सूचना देने पर जेल प्रशासन के ऊपर शक पैदा करता है। हालांकि इस बात की पुष्टि जागता झारखंड नहीं करता है।





