सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक शुभ मुहूर्त, नौ दिनों तक होगी मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना
शक्ति की उपासना का महापर्व शारदीय नवरात्र 11 अक्टूबर से शुरू होगा। पहले दिन कलश स्थापना के साथ मां दुर्गा की आराधना का सिलसिला शुरू हो जाएगा। नौ दिनों तक मां के नौ स्वरूपों की पूजा-अर्चना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और आरती होगी। पंचांग के अनुसार, कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त सुबह 6:19 से 10:12 बजे तक है। वहीं, अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:44 से दोपहर 12:31 बजे तक निर्धारित है। नवरात्र को लेकर श्रद्धालुओं में उत्साह है और घरों व पूजा स्थलों पर तैयारियां शुरू हो गई हैं।
कलश स्थापना से होगी पूजा की शुरुआत
नवरात्र के पहले दिन श्रद्धालु स्नान कर पूजा स्थल की सफाई करेंगे। इसके बाद मिट्टी के पात्र में जौ बोकर विधि-विधान से कलश स्थापित किया जाएगा। कलश में जल, अक्षत, सुपारी और सिक्का डालकर उसके मुख पर आम या अशोक के पत्ते रखे जाते हैं। ऊपर नारियल स्थापित कर मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है। दीप प्रज्वलित कर पूजा-अर्चना शुरू होती है। श्रद्धालु नौ दिनों तक उपवास, भजन-कीर्तन और दुर्गा सप्तशती के पाठ के माध्यम से मां की आराधना करेंगे।
तिथिवार होगी मां के नौ स्वरूपों की पूजा
11 अक्टूबर को मां शैलपुत्री की पूजा और कलश स्थापना होगी। 12 अक्टूबर को मां ब्रह्मचारिणी, 13 अक्टूबर को मां चंद्रघंटा, 14 अक्टूबर को मां कूष्मांडा, 15 अक्टूबर को मां स्कंदमाता, 16 अक्टूबर को मां कात्यायनी और 17 अक्टूबर को मां कालरात्रि की पूजा होगी। 18 अक्टूबर को अष्टमी की विशेष पूजा और 19 अक्टूबर को महानवमी के अनुष्ठान होंगे। इस दौरान मां महागौरी और मां सिद्धिदात्री की आराधना की जाएगी। 20 अक्टूबर को विजयादशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।
पूजा-अर्चना कर सुख-शांति की करेंगे कामना।
नवरात्र के दौरान श्रद्धालु मां दुर्गा से परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना करेंगे। कई घरों में नौ दिनों तक अखंड दीप प्रज्वलित करने, नियमित आरती और कन्या पूजन की परंपरा निभाई जाएगी। कलश स्थापना और अष्टमी-नवमी के अनुष्ठानों के सटीक समय के लिए श्रद्धालु स्थानीय पंचांग के अनुसार पुरोहित से परामर्श ले सकते हैं।






