महंगाई के लिए मोदी जिम्मेदार: उदय लखवानी
सतनाम सिंह पाकुड़।
पाकुड़: लूट भाजपा के डीएनए में मौजूद, केंद्र की मोदी सरकार अमीरो को और अमीर एवं गरीबों को और गरीब बना रही है उक्त बातें कांग्रेस प्रदेश महासचिव उदय लखवानी ने कहीं उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी जिन्होंने एलपीजी सिलेंडर सहित सभी आवश्यक वस्तुओं की कीमत में अत्यधिक वृद्धि के कारण आमजनों की पीड़ा की कभी परवाह नहीं की और वर्षों बाद चुनाव के नजदीक आने पर उन्हें जनता की दर्द का अहसास हुआ और रसोई गैस सिलेंडर की कीमत 200/- रूपये कम कर दी? रसोई गैस की कीमत 2014 से लगातार बढ़ी है और पिछले 07 वर्षों में दोगुनी से ज्यादा हो गई है और 2020 से भाजपा सरकार ने सब्सिडी देने भी बंद कर दिया है। पिछले 02 दशकों में एलपीजी सिलेंडर की मूल्य वृद्धि पर बारीकी से नजर डालने पर हर मतदाता की आँख खुल जाएँगी और एक साधारण व्यक्ति भी स्पष्ट रूप से समझ सकता है कि कीमतें केवल भाजपा शासन के दौरान ही बेरहमी से बढ़ाई गई है। पिछले साढ़े 9 वर्षों में मोदी सरकार ने रसोई गैस के दाम लगातार बढ़ाकर 31.37 करोड़ लोगों को लूटा है, उन्होंने जनता की जेब से रु. 8.33.64076 (आठ लाख तैंतीस हजार छः सौ चालीस करोड़ रुपये) से ज्यादा की लूट की सिर्फ हमारे उज्जवला बहनों से ही, 2017 से अब तक मोदी सरकार ने रू. 68,702.76 (अडसठ हजार सात सौ दो करोड़ रूपये ) से अधिक की लूट किए। एलपीजी सिलेंडर की कीमत में 200 रु० की कटौती मोदी सरकार द्वारा आगामी दिनों में 05 राज्यों में होने वाले चुनाव तथा उसके बाद लोकचुनाव में मतदाताओं को लुभाने का एक राजनीतिक स्टंट है गैस सिलेंडर अब भी महंगा 960 है, मगर भाजपा यह ढोल पीट रही है कि गैस सिलेंडर सस्ता हो गया है। मोदी सरकार द्वारा गैस सिलेंडर सस्ता नहीं हुआ है बल्कि महंगाई का बेंचमार्क बदल दिया गया है। वर्तमान केंद्र सरकार द्वारा जनता की हालत ऐसी कर दी गई है कि “प्यास से गला सूख जाए फिर दो बूंद पानी पिला कर कहो कि सबको पानी मिल गया है. प्यास से राहत मिल गई है। पिछले साढ़े 09 वर्षों में ईंधन में टैक्स द्वारा मोदी सरकार ने 30 लाख करोड़ की मुनाफाखोरी की है। 2014 से अब तक मोदी सरकार द्वारा गैस सिलेंडर के दाम में 185 प्रतिशत की वृद्धि की गई और अभी घटाया कितना गया मात्र 17.5 प्रतिशत अर्थात 2014 की तुलना में अब भी गैस सिलेंडर 167.5 प्रतिशत महँगा है।आम जनता के खरीदने की क्षमता के अनुसार हमारे देश में दुनिया में सबसे महंगा सिलेंडर बिक रहा है कितनी दीवाली, होली, रक्षाबंधन बीत गए और गैस सिलेंडर का दाम बढ़ता ही गया जिन्होंने रसोई गैस में जनता को लूटा उनके द्वारा रक्षा बंधन के नाम पर माता बहनों को राहत देने का नाटक किया जा रहा है जिनका रिकॉर्ड है चुनाव के बाद लगातार दाम बढ़ाने का वो चुनाव से पहले थोड़ा दाम घटा के बड़ी राहत देने की ढोल पीट रहे है। देश की जनता भाजपा की मोदी सरकार के रग-रग से वाकिफ हो चुकी है, अब इनके कोई भी झांसे में नहीं फँसने वाली है।देश में बढ़ती महंगाई पर चिंता का विषय है महंगी गैस, महंगा तेल, थोक और खुदरा महंगाई आजादी के बाद सर्वोच्च शिखर पर है, सिर्फ सत्ता की भूख में मोदी सरकार आम जनता की कमर तोड़ रही है. फिर भी महंगाई से देशवासियों को लूटने का कोई भी अवसर नहीं छोड़ रही है। पेट्रोल 100 के पार डीजल 95 पार, रसोई गैस 900 रूपये खाने का तेल 200 रूपये के पार आम जनता बेबस और लाचार है पर मोदी सरकार केवल अपने चंद पूजीपति मित्रों के मुनाफे की सोच रही है मोदी सरकार ने पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी विगत 7 साल में 258 परसेंट बढ़ाया है और डीजल पर 820 प्रतिशत की बढ़ोतरी की गई है। इन तमाम आकड़ों के बावजूद मोदी सरकार द्वारा महंगाई को झूठलाया जाना यह प्रदर्शित करता है कि महंगाई को काबू करना मोदी सरकार के बस में नहीं है। 2013 में कांग्रेस की मनमोहन सरकार के समय राशन सामाग्री और पेट्रोल-डीजल के दाम और वर्तमान मोदी सरकार के समय आवश्यक वस्तुओं की कीमतें लगभग दुगुनी हो गयी है। 2013 से 2023 तक वस्तुओं के दाम दोगुनी हो गए आटा (10 किलो) 210 रुपये से 440 रुपये हो गया चावल 30-36 रु. किलो से 50-65 रु. किलो हो गया फूल क्रीम दूध 39 रुपये से 66 हो गया रुपये देसी घी 300 रुपये से 875 रुपये हो गया सरसों तेल 52 रुपये 260 रुपये हो गया अरहर दाल 70-80 रुपये से 160-170 रुपये रसोई गैस 410 रुपये से 1177 रुपये अब 900 रुपये पेट्रोल 66 रुपये से 97 रुपये डीजल 52 रुपये से 92 रुपये रिफाइंड तेल 68 रुपये से 148 रुपये फल्लीदाना 60 रुपये से 135 रुपये उड़द दाल 64 रुपये 120 रुपये मूंग दाल 62 रुपये से 130 रुपये मसूर दाल 47 रुपये से 90 रुपये चना दाल 40 रुपये से 66 रुपये, जीरा 220 रुपये से बढ़ कर 450 रुपये हो गया गेहू 22 रुपये से 32-36 रुपये हो गया विभिन्न साबुनों में 22 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुआ दवाई में 32 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई है। मोदी सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण देश की अर्थव्यवस्था लगातार गर्त में जा रही है। देश की जीडीपी 82 से गिरकर 7.2 प्रतिशत हो गयी है। विदेशी मुद्रा भंडार लगातार कम हो रहे है। अंतरराष्ट्रीय व्यापार संतुलन बिगड़ने से आयात पर निर्भरता तेजी से बढ़ रही है। देश पर कुल कर्ज का भार 3 गुना बढ़ चुका है। विगत 12 महीनों में डॉलर के मुकाबले रुपए का मूल्य 12 प्रतिशत से ज्यादा गिर चुका है। मोदी राज में विगत एक माह में ही विदेशी मुद्रा भंडार लगभग 26 बिलियन डालर कम हुआ है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल 2014 की तुलना में 20 परसेंट कम होने के बावजूद डीजल और पेट्रोल 30 से 40 रुपए प्रति लीटर महंगे बेचे जा रहे है थोक और खुदरा महंगाई दर आरबीआई द्वारा तय सीमा से लगातार ऊपर है लेकिन मोदी सरकार का फोकस केवल चंद पूंजीपतियों के मुनाफे पर केंद्रित है।










