Search

June 21, 2026 2:15 am

मामा की गाइडलाइन और नाना के संस्कार से चमके अस्मित, BPSC में 158वीं रैंक लाकर बने DSP

महेशपुर बीडीओ सिद्धार्थ शंकर यादव ने भांजे की कामयाबी पर जताई खुशी, कहा- पूरे क्षेत्र के लिए गर्व का क्षण

इंजीनियरिंग की पढ़ाई के बाद शतरंज के खिलाड़ी अस्मित ने प्रशासनिक सेवा में मारी बाजी

बिहार लोक सेवा आयोग (BPSC) की परीक्षा में पूर्णिया जिले के मेधावी छात्र अस्मित कुमार ने अपनी सफलता का परचम लहराया है। अस्मित ने परीक्षा में शानदार 158वीं रैंक हासिल कर बिहार पुलिस सेवा में उप पुलिस अधीक्षक (DSP) का पद प्राप्त किया है। उनकी इस गौरवमयी उपलब्धि पर उनके मामा सह महेशपुर के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) सिद्धार्थ शंकर यादव ने गहरी खुशी जाहिर करते हुए उन्हें बधाई व शुभकामनाएं दी हैं। बीडीओ ने कहा कि अस्मित की यह सफलता केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए गौरव की बात है।

नाना के घर संवरी प्रारंभिक शिक्षा, माता-पिता से मिला शैक्षणिक माहौल

पूर्णिया जिले के बड़हरा कोठी प्रखंड अंतर्गत देवरी पंचायत के रहने वाले अस्मित कुमार की सफलता की कहानी कड़ी मेहनत, अनुशासन और सटीक मार्गदर्शन की मिसाल है। अस्मित के पिता प्रोफेसर मनोज कुमार और माता अंजनी कुमारी (शिक्षिका) हैं। माता-पिता के शैक्षणिक परिवेश का लाभ तो अस्मित को मिला ही, साथ ही उनकी प्रारंभिक शिक्षा उनके नाना श्री ब्रह्मदेव यादव के घर रहकर पूरी हुई। नाना स्वयं एक शिक्षक रहे हैं, जिनके दिए संस्कारों और शिक्षा के प्रति समर्पण ने अस्मित की नींव को मजबूत किया।

मेंस और इंटरव्यू के लिए मामा ने दिए ‘सफलता के टिप्स’

पारिवारिक रिश्तों के ताने-बाने में अस्मित की माता अंजनी कुमारी, महेशपुर बीडीओ सिद्धार्थ शंकर यादव की बड़ी बहन हैं। इस नाते बीडीओ सिद्धार्थ शंकर यादव अस्मित के मामा हैं। परीक्षा की तैयारी के दौरान मामा-भांजे की इस जुगलबंदी ने कमाल कर दिया। BPSC मुख्य परीक्षा (मेंस) और इंटरव्यू की तैयारी के दौरान अस्मित कुछ समय के लिए अपने मामा के पास महेशपुर आए थे। यहां रहकर उन्होंने प्रशासनिक बारीकियों को समझा और मामा की सटीक गाइडलाइन व जरूरी टिप्स को आत्मसात किया, जो उनकी सफलता में टर्निंग पॉइंट साबित हुआ।

मैकेनिकल इंजीनियर हैं अस्मित, शतरंज में भी है गहरी रुचि

अस्मित की शैक्षणिक पृष्ठभूमि भी बेहद शानदार रही है। उन्होंने अपनी दसवीं तक की पढ़ाई संत हाई स्कूल, घोघा (भागलपुर) से पूरी की। इसके बाद उन्होंने हरिद्वार स्थित प्रतिष्ठित गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय से मैकेनिकल इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। पढ़ाई के साथ-साथ अस्मित की रुचि शतरंज के खेल में भी रही है, जिसने उनकी एकाग्रता और रणनीतिक सोच को और बेहतर बनाया।अस्मित की इस ऐतिहासिक सफलता से उनके पैतृक गांव, रिश्तेदारों और महेशपुर क्षेत्र में खुशी की लहर है। बधाई देने वालों का तांता लगा हुआ है। सभी का मानना है कि अस्मित की यह कामयाबी क्षेत्र के अन्य युवाओं के लिए भी प्रेरणास्रोत बनेगी।

Leave a Comment

लाइव क्रिकेट स्कोर
error: Content is protected !!