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July 5, 2026 1:23 am

मेंटेनेंस या जनता की परीक्षा? पाकुड़ की बदहाल बिजली व्यवस्था पर कब जागेगा विभाग

राज्य को हजारों करोड़ का राजस्व देने वाले पाकुड़ को आखिर कब मिलेगी निर्बाध बिजली और बुनियादी सुविधाओं का हक?

पाकुड़ की बिजली व्यवस्था इन दिनों आम लोगों के लिए सबसे बड़ी परेशानी बन चुकी है। मेंटेनेंस के नाम पर लगभग हर सप्ताह कई घंटों, कभी-कभी पूरे दिन तक बिजली आपूर्ति ठप कर दी जाती है। इतना ही नहीं, विभाग द्वारा निर्धारित समय समाप्त होने के बाद भी बिजली बहाल नहीं होती। शाम होते ही ट्रिपिंग और आंख-मिचौली का दौर शुरू हो जाता है, जो देर रात तक जारी रहता है। ऐसे में लोगों के मन में एक ही सवाल उठ रहा है—आखिर यह मेंटेनेंस किसके लिए और किस परिणाम के लिए किया जा रहा है?

विडंबना यह है कि पाकुड़ पत्थर उद्योग, खनन और अन्य आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से झारखंड सरकार के राजस्व में महत्वपूर्ण योगदान देने वाला जिला माना जाता है। स्थानीय स्तर पर यह दावा किया जाता है कि यह जिला राज्य को हजारों करोड़ रुपये का राजस्व देता है। इसके बावजूद बिजली जैसी बुनियादी सुविधा का यह हाल जिले की उपेक्षा की ओर इशारा करता है। इस बदहाल व्यवस्था का सबसे अधिक असर विद्यार्थियों, मरीजों, छोटे व्यापारियों, किसानों और आम उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। लोग समय पर बिजली बिल जमा करते हैं, लेकिन बदले में उन्हें अनियमित आपूर्ति, घंटों की कटौती और लगातार ट्रिपिंग झेलनी पड़ती है। सवाल यह भी है कि जब हर सप्ताह मेंटेनेंस हो रहा है तो बिजली व्यवस्था में स्थायी सुधार क्यों नहीं दिख रहा?

बिजली आपूर्ति में लगातार हो रही अव्यवस्था ने विभाग की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। आम लोगों का कहना है कि विभाग को केवल कटौती का शेड्यूल जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि तय समय के भीतर काम पूरा कर निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करनी चाहिए। जनता को यह जानने का भी अधिकार है कि बार-बार होने वाले मेंटेनेंस से अब तक क्या सुधार हुआ। बिजली जैसी मूलभूत सुविधा किसी भी जिले के विकास की रीढ़ होती है। यदि राजस्व देने वाले जिले के लोग ही अंधेरे में रहने को मजबूर हों, तो यह निश्चित रूप से गंभीर चिंता का विषय है। अब जरूरत केवल आश्वासनों की नहीं, बल्कि जवाबदेही तय करने और व्यवस्था में ठोस सुधार की है। जनता का सवाल सीधा है—जब जिला राज्य की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभा रहा है, तो क्या उसे निर्बाध बिजली और बेहतर बुनियादी सुविधाएं मिलना उसका अधिकार नहीं है? अब सरकार, जिला प्रशासन और बिजली विभाग को इस सवाल का जवाब शब्दों से नहीं, बल्कि जमीन पर दिखने वाले सुधार से देना होगा।

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