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October 9, 2026 8:52 pm

खेतों में नवाचार करने वाले झारखंड के किसान ही है असली वैज्ञानिक- डॉ. एमएल जाट

अक्षय कुमार

मांडू (रामगढ़)। कृषि विज्ञान केंद्र (केवीके), रामगढ़ परिसर में आयोजित किसान-वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रम में किसानों की सफलता की कहानियां प्रमुखता से सामने आईं। बताते चले कि कभी खेती-बाड़ी का अनुभव नहीं रखने वाली लोधमा गांव की संगीता देवी आज खेती और पशुपालन के जरिए सालाना सात से आठ लाख रुपये की कमाई कर रही हैं। उनकी सफलता की कहानी सुनकर महानिदेशक भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद सह सचिव डेयर डॉ. एमएल जाट बहुत प्रभावित हुए। उन्होंने तालियां बजाकर महिला किसान का उत्साहवर्धन किया और कहा, “झारखंड के किसान ही हमारे असली वैज्ञानिक हैं। वे अपने अनुभव, मेहनत और नवाचार से खेतों में नई संभावनाएं पैदा कर रहे हैं।” इसी क्रम में संगीता देवी ने अपनी कृषि यात्रा साझा करते हुए बताया कि वर्ष 2019 में शादी के बाद लोधमा स्थित ससुराल आने पर उनका संपर्क कृषि विज्ञान केंद्र से हुआ। केंद्र में मिले प्रशिक्षण और कृषि वैज्ञानिकों के मार्गदर्शन ने उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकों से परिचित कराया। आज वह करीब 10 एकड़ जमीन पर मौसमी सब्जियों की खेती के साथ बकरी पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन तथा हल्दी और ओल की खेती कर रही हैं। इन विविध कृषि गतिविधियों से उन्हें सालाना सात से आठ लाख रुपये की आमदनी हो रही है। इसी गांव के किसान राज रंजन बेदिया ने भी अपनी सफलता की कहानी सुनाई। उन्होंने बताया कि आठ एकड़ जमीन पर ड्रिप सिंचाई तकनीक अपनाकर आम की बागवानी से वह सालाना करीब 8 से10 लाख कमा रहे हैं। उनकी उपलब्धि की भी डॉ. जाट ने सराहना की। परती जमीन को बनाएं आमदनी का जरिया किसानों को संबोधित करते हुए डॉ. जाट ने कहा कि झारखंड के किसान बेहद मेहनती हैं।

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वे विपरीत परिस्थितियों में भी परिश्रम कर खेतों में बेहतर उत्पादन हासिल करते हैं। जरूरत है कि किसानों के पारंपरिक अनुभव को वैज्ञानिक तकनीकों से जोड़कर खेती को अधिक लाभकारी बनाया जाए। उन्होंने कहा कि झारखंड में कृषि क्षेत्र में नई क्रांति लाने की व्यापक संभावनाएं हैं। उन्होंने किसानों से धान की कटाई के बाद खाली रहने वाली जमीन का उपयोग रबी फसलों की खेती के लिए करने की अपील की। उन्होंने कहा कि स्थानीय जलवायु, मिट्टी और उपलब्ध संसाधनों के अनुरूप किसान गेहूं, दलहन और तिलहन की खेती कर सकते हैं। इससे परती भूमि का बेहतर उपयोग होगा, फसल विविधीकरण को बढ़ावा मिलेगा और किसानों की आमदनी बढ़ाने के नए अवसर पैदा होंगे।।प्रशिक्षण और तकनीक से बदल रही किसानों की तस्वीर कार्यक्रम की शुरुआत कृषि विज्ञान केंद्र, रामगढ़ के प्रमुख सह प्रधान वैज्ञानिक डॉ. सुधांशु शेखर ने की। उन्होंने मुख्य अतिथि डॉ. एम.एल जाट तथा विशिष्ट अतिथि डॉ. डी. के. यादव, उप महानिदेशक (फसल विज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्ली को पुष्पगुच्छ और अंगवस्त्र भेंट कर स्वागत किया। डॉ. जाट ने केंद्र की विभिन्न गतिविधियों का जायजा लिया। उन्होंने किसानों को नियमित प्रशिक्षण देने तथा वैज्ञानिक तकनीकों को खेतों तक पहुंचाने पर जोर दिया। केंद्र परिसर में लगाई गई कृषि प्रदर्शनी का अवलोकन करते हुए उन्होंने विभिन्न कृषि गतिविधियों और तकनीकों की जानकारी ली। इस दौरान कृषि प्रणाली के पहाड़ी एवं पठारी अनुसंधान केंद्र, रांची के प्रधान डॉ. अवनि कुमार सिंह, जिला कृषि पदाधिकारी डॉ. शुभांकर गुप्ता, डॉ. इंद्रजीत, डॉ. धर्मजीत खेरवार और प्रक्षेत्र प्रबंधक सन्नी कुमार सहित जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए महिला एवं पुरुष किसान उपस्थित थे।

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फलदार पौधे लगाकर दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश। कार्यक्रम के दौरान डॉ. एम.एल. जाट और डॉ. डी.के. यादव ने कृषि विज्ञान केंद्र रामगढ परिसर में एक-एक फलदार पौधा लगाया। इसके बाद उन्होंने केंद्र के विभिन्न प्रक्षेत्रों का भ्रमण किया। इस दौरान केवीके प्रमुख डॉ. सुधांशु शेखर ने उन्हें केंद्र की प्रमुख गतिविधियों, किसानों को दिए जा रहे प्रशिक्षण और कृषि तकनीकों के प्रसार से संबंधित कार्यों की जानकारी दी।

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