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August 6, 2026 1:35 am

पेसा कानून 1996 की शक्तियां खत्म करने का आरोप, झारखंड नियमावली 2025 रद्द करने की मांग।

पाकुड़। रविंद्र भवन में शनिवार को उपायुक्त की अध्यक्षता में पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025 को लेकर जिला स्तरीय राउंड टेबल कॉन्फ्रेंस आयोजित हुई। बैठक में आदिवासी संतवा सुसार अखड़ा (झारखंड) के सचिव शिवचरण मालतो ने झारखंड नियमावली 2025 पर सवाल उठाते हुए इसे पेसा कानून 1996 की मूल भावना के विपरीत बताया। शिवचरण मालतो ने कहा कि संसद द्वारा बनाए गए पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) अधिनियम, 1996 (पेसा कानून) का उद्देश्य अनुसूचित क्षेत्रों में ग्रामसभा को अधिकार और स्थानीय स्वशासन को मजबूत करना है। लेकिन राज्य सरकार द्वारा झारखंड पंचायत राज अधिनियम, 2001 और नई नियमावली 2025 के माध्यम से पेसा कानून के कई महत्वपूर्ण प्रावधानों को कमजोर कर दिया गया है। शिवचरण मालतो ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 254 के अनुसार केंद्र और राज्य के कानूनों में टकराव होने पर केंद्रीय कानून प्रभावी होता है। उन्होंने आरोप लगाया कि झारखंड नियमावली 2025 में पेसा अधिनियम की धारा 4(M) और 4(O) के प्रावधानों को प्रभावहीन किया गया है। उन्होंने बताया कि धारा 4(M) में स्वशासी जिला परिषद के गठन और धारा 4(O) में विशेष ग्रामसभा गठन सहित ग्रामसभा को अधिकार देने का प्रावधान है। उनके अनुसार नई नियमावली में इन अधिकारों को शामिल नहीं किया गया है, जो पेसा कानून और संवैधानिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है। उन्होंने मांग की कि अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा अधिनियम 1996 को पूरी तरह लागू किया जाए और झारखंड नियमावली 2025 के उन प्रावधानों को रद्द किया जाए जो पेसा कानून से असंगत हैं। उन्होंने कहा कि अनुसूचित क्षेत्रों में जनजातीय समुदायों के अधिकार, जमीन और संसाधनों की सुरक्षा के लिए पेसा कानून बनाया गया था, लेकिन इसके कमजोर होने से आदिवासी समुदायों के सामने कई चुनौतियां खड़ी हो रही हैं।

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