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August 25, 2026 8:51 pm

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काजू बागान सामूहिक दुष्कर्म मामले में नौ दोषियों को अंतिम सांस तक उम्रकैद व जुर्माना।

पाकुड़। हिरणपुर थाना क्षेत्र के चर्चित काजू बागान सामूहिक दुष्कर्म मामले में पाकुड़ की अदालत ने मंगलवार को कड़ा फैसला सुनाते हुए नौ दोषियों को प्राकृतिक जीवन के अंत तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। अपर सत्र न्यायाधीश प्रथम कुमार क्रांति प्रसाद की अदालत ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376-डी के तहत सभी दोषियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया है। यह वही काजू बागान दुष्कर्म मामला है, जो घटना के समय जिले में काफी चर्चा में रहा था।

पति को बंधक बनाकर दिया था वारदात को अंजाम

मामला हिरणपुर थाना कांड संख्या 35/2024 से संबंधित है। प्राथमिकी के अनुसार, 1 जून 2024 की शाम करीब 6:30 बजे 19 वर्षीय पीड़िता अपने पति के साथ हिरणपुर थाना क्षेत्र के सहरपुर स्थित काजू बागान में टहलने गई थी। इसी दौरान आरोपित वहां पहुंचे और पीड़िता के पति को बंधक बना लिया। इसके बाद आरोपितों ने पीड़िता के साथ जबरदस्ती करते हुए उसे झाड़ियों में ले जाकर सामूहिक दुष्कर्म किया। घटना के अगले दिन 2 जून 2024 को हिरणपुर थाना में मामला दर्ज किया गया था।

छह गवाहों ने अदालत में दी गवाही

सत्र वाद संख्या 143/2024 में हुई सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से कुल छह महत्वपूर्ण गवाह पेश किए गए। साक्ष्यों और गवाहों के आधार पर अदालत ने सभी नौ आरोपितों को दोषी करार दिया। बचाव पक्ष की ओर से दोषियों की कम उम्र का हवाला देकर सजा में नरमी की अपील की गई, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया।
अदालत ने अपने फैसले में घटना को बेहद गंभीर और समाज की संवेदनाओं को झकझोरने वाला अपराध माना। न्यायालय ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा सभ्य समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और इस तरह के जघन्य अपराधों में कठोर सजा आवश्यक है।

नौ दोषियों को अंतिम सांस तक कारावास

दोषियों में मानवेन मरांडी (28), चंदन सोरेन उर्फ चांद सोरेन (29), विवेक सोरेन (22), लखीराम मृधा उर्फ बाबूलाल मरांडी (22), जेने हांसदा (27), विश्वनाथ हेम्ब्रम (24), पांडु हेम्ब्रम (30), मिस्त्री हेम्ब्रम (30) और सकल हांसदा (34) शामिल हैं। सभी आरोपी हिरणपुर थाना क्षेत्र के कस्तूरी गांव के निवासी हैं। अदालत ने सभी नौ दोषियों को प्राकृतिक जीवन के अंत तक कठोर आजीवन कारावास की सजा सुनाई। साथ ही प्रत्येक पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है। जुर्माना नहीं देने पर एक वर्ष का अतिरिक्त साधारण कारावास भुगतना होगा।

जुर्माने की पूरी राशि पीड़िता को मिलेगी

अदालत ने निर्देश दिया कि जुर्माने से प्राप्त पूरी राशि पीड़िता को मानसिक एवं शारीरिक पीड़ा के मुआवजे के रूप में दी जाए। इसके अलावा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डीएलएसए), पाकुड़ को विक्टिम कंपनसेशन स्कीम के तहत पीड़िता के लिए उचित अतिरिक्त मुआवजा निर्धारित करने का निर्देश दिया गया है।

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