विकास के दावों को आईना दिखा रहा करनघाटी गांव, ग्रामीण बोले- आश्वासन बहुत मिले, सड़क आज तक नहीं बनी।
प्रशांत मंडल
लिट्टीपाड़ा (पाकुड़)। विकास के बड़े-बड़े दावों के बीच लिट्टीपाड़ा प्रखंड की बड़ा सरसा पंचायत का करनघाटी गांव आज भी बदहाल सड़क की तस्वीर पेश कर रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, करीब दो दशक से गांव में पक्की सड़क का इंतजार है, लेकिन अब तक उनकी यह मांग धरातल पर नहीं उतर सकी है। सड़क के नाम पर जगह-जगह कीचड़, गंदा पानी और जलजमाव ग्रामीणों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन चुका है। बारिश होते ही गांव की स्थिति और बदतर हो जाती है। कीचड़ से लथपथ रास्ते पर पैदल चलना भी मुश्किल हो जाता है। महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ती है। पीने का पानी लेने जाने वाली महिलाओं को भी इसी जोखिम भरे रास्ते से गुजरना पड़ता है। फिसलन के कारण आए दिन गिरने का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क निर्माण को लेकर कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों से गुहार लगाई गई। हर बार आश्वासन मिला, लेकिन सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान नेता गांव तक पहुंचकर विकास के बड़े-बड़े वादे करते हैं और चुनाव समाप्त होते ही उनकी समस्याएं फिर नजरअंदाज कर दी जाती हैं।
वादों की सड़क पर अटका विकास
करनघाटी की बदहाल सड़क शासन-प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के विकास के दावों पर सवाल खड़े कर रही है। एक तरफ गांवों के विकास और बुनियादी सुविधाओं को लेकर योजनाओं की बात होती है, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण करीब 20 वर्षों से एक पक्की सड़क के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में यह सड़क सिर्फ आवागमन की समस्या नहीं, बल्कि जमीनी विकास और सरकारी दावों के बीच के अंतर की तस्वीर भी बन गई है। अब ग्रामीणों का सब्र जवाब देने लगा है। ग्रामीणों ने कहा कि यदि जल्द सड़क निर्माण की दिशा में ठोस पहल नहीं की गई तो आगामी चुनाव में वोट बहिष्कार जैसे कदम पर विचार किया जाएगा। ग्रामीणों का सवाल सीधा है—जब दो दशक से गांव की सड़क नहीं बन सकी, तो विकास के दावे आखिर किसके लिए हैं?








