6 अक्टूबर को सभापति-उपसभापति का चुनाव, 19 तृणमूल और 5 कांग्रेस सदस्यों की एकजुटता का दावा।
अपहरण की प्राथमिकी और महिला सदस्यों से बदसलूकी के आरोपों ने बढ़ाया विवाद।
पाकुड़। पश्चिम बंगाल के मालदा जिला परिषद की सत्ता का संग्राम अब झारखंड के पाकुड़ की धरती पर पहुंच गया है। शुक्रवार देर रात शहर के रॉयल रेजीडेंसी होटल में उस समय हड़कंप मच गया, जब मालदा के रतुआ थाना की पुलिस भारी संख्या में जवानों के साथ पहुंची। होटल में ठहरे जिला परिषद सदस्यों को अपने साथ ले जाने की कोशिश पर जमकर हंगामा हुआ। सदस्यों ने पुलिस कार्रवाई का विरोध किया। देखते ही देखते पुलिसकर्मियों और सदस्यों के बीच तीखी नोकझोंक और धक्का-मुक्की शुरू हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पाकुड़ नगर थाना की पुलिस ने मौके पर पहुंचकर हस्तक्षेप किया और हालात संभाले।
अपहरण की प्राथमिकी के बाद होटल पहुंची थी बंगाल पुलिस
दरअसल, मालदा जिला परिषद के सभापति और सह-सभापति पद का चुनाव 6 अक्टूबर को होना है। इसी बीच रतुआ थाना में लल्टू चौधरी ने अपनी पत्नी मंगली चौधरी के कथित अपहरण की शिकायत दर्ज कराई। 2 अक्टूबर को दर्ज प्राथमिकी में आरोप लगाया गया है कि उनकी पत्नी को करीब छह दिन पहले अज्ञात लोग घर से जबरन ले गए और झारखंड में किसी अज्ञात स्थान पर रखा है। इस मामले में भारतीय न्याय संहिता की धारा 137(2) के तहत प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई है। इसी मामले के सिलसिले में बंगाल पुलिस पाकुड़ पहुंची थी।
सदस्यों का दो टूक जवाब- अपनी मर्जी से आए, कोई दबाव नहीं
होटल में मौजूद जिला परिषद सदस्यों ने अपहरण और बंधक बनाए जाने के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने पाकुड़ नगर थाना प्रभारी अनिल कुमार गुप्ता के समक्ष भी स्पष्ट किया कि वे अपनी मर्जी से झारखंड आए हैं। किसी ने उन्हें बंधक नहीं बनाया है और न ही उन पर किसी प्रकार का दबाव है। महिला सदस्यों ने भी खुद को सुरक्षित बताते हुए स्थानीय नेताओं और पाकुड़ पुलिस प्रशासन के सहयोग के लिए आभार जताया।
महिला सदस्यों से बदसलूकी का आरोप, सत्ता के दुरुपयोग का दावा
जिला परिषद सदस्य सागरिका सरकार ने बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि चुनाव से ठीक पहले पुलिस के माध्यम से सदस्यों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि आधी रात की कार्रवाई के दौरान महिला सदस्यों की चुनरी और साड़ी खींची गई तथा उनके साथ बदसलूकी और धक्का-मुक्की की गई। सदस्यों ने कहा कि वे किसी भी दबाव में आए बिना 6 अक्टूबर को चुनाव में हिस्सा लेंगे। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
मालदा जिला परिषद का सियासी गणित भी समझिए
मालदा जिला परिषद में कुल 43 सीटें हैं। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक, तृणमूल कांग्रेस के 34, कांग्रेस के 5 और भाजपा के 4 सदस्य हैं। होटल में मौजूद प्रतिनिधिमंडल के सदस्यों के अनुसार, उनके साथ तृणमूल कांग्रेस के 19 और कांग्रेस के 5 सदस्य हैं। हालांकि, होटल में मौजूद सदस्यों की कुल संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। सदस्यों ने अपने पक्ष में बहुमत होने का दावा करते हुए एकजुटता दिखाई।
होटल पहुंचकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने भी जताया विरोध
घटना की सूचना मिलते ही पाकुड़ कांग्रेस कमेटी के कार्यकर्ता भी होटल पहुंचे और बंगाल पुलिस की कार्रवाई पर विरोध जताया। देर रात तक होटल के बाहर पुलिस की मौजूदगी बनी रही। एक तरफ मालदा पुलिस अपहरण की प्राथमिकी के आधार पर कार्रवाई की बात कर रही थी, वहीं दूसरी तरफ जिला परिषद सदस्य अपनी स्वेच्छा से पाकुड़ आने का दावा करते रहे।
अब 6 अक्टूबर के चुनाव पर टिकी नजरें
एक जिला परिषद सदस्य के अपहरण की प्राथमिकी, दूसरे सदस्यों की स्वेच्छा से आने की दलील और पुलिस कार्रवाई के दौरान बदसलूकी के आरोपों ने पूरे मामले को राजनीतिक रूप से संवेदनशील बना दिया है। मालदा की जिला परिषद की कुर्सी के लिए शुरू हुई खींचतान अब अंतरराज्यीय पुलिस कार्रवाई और राजनीतिक टकराव का रूप ले चुकी है। अब सबकी निगाहें 6 अक्टूबर को होने वाले चुनाव और इस पूरे प्रकरण में पुलिस की जांच पर टिकी हैं।








